रमेश मुन्दड़ा
होजाई: होजाई साहित्य सभा ने 24 मई को अपनी नियमित साहित्यिक शृंखला के तहत एक विशेष लघु-कथा (अणु/परमाणु कथा) पाठ का आयोजन किया। विख्यात गीतकार और परमाणु-कथाओं के प्रवर्तक सरत बरकाकति के संचालन में हुए इस आयोजन में कई वरिष्ठ कथाकारों ने संक्षिप्त परन्तु प्रभावशाली कथाएँ प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम में कथाकार कलपना देवी गोस्वामी, पद्मकांत बोरा, अनुप कुमार बरठाकुर, दयाल चंद्र क़ो., कल्याण कुमार रायचौधुरी, तरुण चंद्र देवचौधुरी, कुशेश्वर मुडोई, निबा देवी, श्रुति कुमार सिंह, कमल चंद्र सेकिया, अच्युत ठाकुरिया, पुष्प बोरा, अनीमा बरुआ, रेखा लस्कर बोरा, अमल कलिता, डॉ. शम्सुल हक, आराधना शर्मा, हिमू कुमार नाथ और प्रीतिरेखा दास शामिल रहे। असम की प्रमुख कथाकार त्रिश्णा बरकाकति ने भी दर्शकों के लिए दो कहानियाँ पढ़ीं।
संचालक सरत बरकाकति ने कहा कि असमिया साहित्य में संक्षिप्त रूप की कहानियों की परंपरा रही है, पर “परमाणु” या माइक्रो-कथा का चलन यहाँ अपेक्षाकृत नया है। उन्होंने बताया कि अंग्रेज़ी साहित्य में प्रसिद्ध छह-शब्द की छोटी कहानी से उन्हें यह विचार मिला था, और परमाणु-कथा की परिभाषा इस तरह पेश की कि वह ऐसी रचना है जिसका अस्तित्व स्पष्ट है पर विस्तार न्यूनतम; कई बार एक ही वाक्य पूरी कहानी कह देता है।
होजाई में इस प्रकार के लघु-रूप की चर्चाएँ और पठन-सत्र साहित्य की नवप्रवर्तनशीलता के लिए शुभ संकेत हैं। होजाई साहित्य सभा की अध्यक्ष कलपना देवी गोस्वामी व सचिव सर्वेश्वर पाठक ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम के आयोजकों, पढ़ने वाले लेखकों और उपस्थित श्रोताओं का धन्यवाद व्यक्त किया।








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