लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
लखीमपुर: स्थानीय श्री श्री सीतारामजी ठाकुरवाड़ी मंदिर प्रांगण आगामी 12 जून से 15 जून तक भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक चेतना के दिव्य संगम का साक्षी बनने जा रहा है। मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा के तत्वावधान में आयोजित होने वाली चार दिवसीय अमृतमयी श्रीकृष्ण कथा एवं धार्मिक अनुष्ठान को लेकर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह, उल्लास एवं धार्मिक आस्था का वातावरण निरंतर गहराता जा रहा है। जैसे-जैसे आयोजन की तिथि निकट आती जा रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं में कथा श्रवण को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है। आयोजन समिति द्वारा कार्यक्रम को ऐतिहासिक एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने हेतु तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट, भव्य प्रकाश व्यवस्था एवं आध्यात्मिक वातावरण से सुसज्जित करने का कार्य तेजी से जारी है, ताकि श्रद्धालुओं को एक दिव्य एवं अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हो सके। इस धार्मिक आयोजन की विशेषता यह रहेगी कि राजस्थान के नोखा निवासी सुप्रसिद्ध कथा वाचक सुश्री मोनिका पारीक व्यासपीठ से अपने ओजस्वी एवं मधुर मुखारविंद द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं, धर्म, प्रेम, भक्ति, करुणा और जीवन दर्शन से परिपूर्ण अमृतमयी कथा का रसपान कराएंगी। उनकी मधुर वाणी एवं भावपूर्ण प्रस्तुति श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर आत्मिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगी। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन, नीति, कर्तव्य एवं मानवता के संदेशों को सरल एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे युवा पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं के प्रति प्रेरणा प्राप्त होगी। चार दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 12 जून की सुबह भव्य कलश यात्रा के साथ किया जाएगा। इस पावन यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर मंगल गीतों एवं जयघोष के साथ नगर भ्रमण करेंगी, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश यात्रा किसी भी शुभ अनुष्ठान का आध्यात्मिक आह्वान मानी जाती है, जो सकारात्मक ऊर्जा एवं धार्मिक चेतना का संचार करती है। आयोजन समिति ने नगरवासियों से इस शुभ यात्रा में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। कलश यात्रा के उपरांत प्रतिदिन संध्या 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रीकृष्ण कथा का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करेंगे। कथा के मध्य राजस्थान से आए कलाकारों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं पर आधारित मनमोहक, जीवंत एवं भावपूर्ण झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी। रंग-बिरंगी प्रस्तुति, सांस्कृतिक सौंदर्य एवं भक्ति संगीत से परिपूर्ण ये झांकियां श्रद्धालुओं को वृंदावन की दिव्यता का साक्षात अनुभव कराने का प्रयास करेंगी। कथा के प्रथम दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, बाल्यकाल, पूतना वध एवं बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण के उद्देश्य, उनके बाल स्वरूप की चंचल लीलाओं एवं अधर्म के विनाश से जुड़े प्रसंगों को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला, महारास लीला, उद्धव-गोपी संवाद एवं रुक्मिणी विवाह जैसे आध्यात्मिक एवं प्रेममय प्रसंगों का श्रवण करेंगे, जो भक्ति, प्रेम, समर्पण एवं ईश्वर के प्रति अनन्य विश्वास का संदेश देंगे। वहीं तृतीय दिवस भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य विवाह प्रसंग एवं सुदामा चरित्र की मार्मिक कथा प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें मित्रता, समर्पण, स्नेह और सच्चे प्रेम की महत्ता को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से दर्शाया जाएगा। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच फूलों की आनंदमयी एवं भक्तिरस से ओतप्रोत होली खेली जाएगी, जो आयोजन का एक विशेष आकर्षण होगी और उपस्थित श्रद्धालुओं को वृंदावन की दिव्य अनुभूति प्रदान करेगी। कार्यक्रम के अंतिम दिवस 15 जून को वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक विधि-विधान एवं श्रद्धा-भक्ति के वातावरण के मध्य हवन-पूजन संपन्न कराया जाएगा, जिसके साथ इस चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत समापन होगा। श्रद्धालु हवन में आहुति अर्पित कर परिवार, समाज एवं विश्व कल्याण की कामना करेंगे। मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा की पदाधिकारी एवं सदस्यों ने समस्त नगरवासियों, श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी लोगों से अपने इष्ट-मित्रों, परिजनों एवं परिवार के सदस्यों सहित इस चार दिवसीय श्रीकृष्ण कथा में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ, आध्यात्मिक शांति एवं अक्षय पुण्य अर्जित करने का विनम्र अनुरोध किया है। समिति का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल समाज को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों एवं पारिवारिक एकता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। नगर में इस आयोजन को लेकर विशेष चर्चा का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु बेसब्री से कथा प्रारंभ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अनुमान लगाया जा रहा है कि चारों दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और कृष्णमय वातावरण से सराबोर रहेगा।








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