अमित नागोरी
असम साहित्य सभा का 105 वा केंद्रीय स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ हाल ही में सम्पन्न हुआ । इस दौरान नगर के समन्वय क्षेत्र में विभिन्न जाति जंगोष्टी का समावेश हुआ । उक्क्त समावेश में जिले के आयोजन समिति के पदाधिकारियों के अलावा विशिष्ट लेखक , कवि , समाजकर्मी , शिक्षा अनुष्ठानों , साहित्य सभा के पदाधिकारियों , प्रशासनिय अधिकारियों के अलावा विभिन्न छात्र संगठनों , व्यवसायियों के अलावा अन्यान्य सहित्य प्रेमी लोगो के उपस्थिती में ओ मुर आपुनार देश , चिर सेनेही मुर भाषा जननी के गीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । 105 महिलाओं ने ओ मुर आपुनार देश गीत गाया । गोलाघाट के समन्वय क्षेत्र मे असम साहित्य सभा के ध्वजा रोहन के साधन हुआ जिसमें मूल ध्वज अध्यक्ष कुलधर सैकिया ने लहराया । इस मौके पर 105 संख्यक प्रतिस्ठा दिवस के मद्देनजर एक साथ 105 ध्वज भी लहराए गए । ध्वजारोहण कार्यक्रम में असम साहित्य सभा के पदाधिकारियों में डॉ परमानन्द राजवंशी , मृणालिनी देवी के साथ ओलिम्पिक पदक प्राप्त लवलीना बोरगोहाई के साथ के साथ अन्य विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा लहराया गया । स्मृति तर्पण उपाध्यक्ष मृणालिनी देवी ने किया । दीप प्रज्वलन पूर्ण राजखोवा ने किया । तर्पक के रूप में पवित्र बोरबोरा रहे । गोलाघाट के रंगमेला सांस्कृतिक समूह के कोने कोने के कलाकार द्वारा प्रस्तुत गीत-नृत्य 'आई तोक किहरे पूजिम' के प्रदर्शन ने एक गंभीर माहौल बनाया। सांस्कृतिक शोभायात्रा में कार्बी नृत्य , मिसिंग , बोडो , झुमुर , भोरताल आदि नृत्य प्रदर्शित करते हुए बड़ी संख्या में लोगो ने भाग लिया और इसका उद्घाटन जिला उपायुक्त मृगेश नारायण बरुवा ने किया । इसके बाद खुली सभा का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ कुलधर सैकिया ने किया । सभा मे दीप प्रज्वलन विधायक बिश्वजीत फुकन ने किया ।
उद्घाटन बैठक का उद्घाटन अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात लेखक, सेवानिवृत्त उच्च पदस्थ वायु सेना अधिकारी महंतो पांगीग ने किया । असम साहित्य सभा के प्रधान सचिव यादव चंद्र शर्मा और स्वागत समिति के महासचिव दिगंत कुमार भुइयां ने कार्यक्रम का संचालन किया । स्वागत वक्तव्य देबोजित फुकन ने दिया । अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर में उड़ान भरने वाली पहली वायु सेना के रूप में, मैं फाइटर से राइटर बन गया।" उन्होंने कहा कि अरुणाचल में असमिया भाषा प्रायः चर्चा नही की जाती पर शोक जताया । सभा मे मुख्य अतिथि के रूप में नगालैंड के सरवोच्च जातीय अभिवावक नागालैंड के नागा हो हो के अध्यक्ष एचके झिम्मी ने नगा-असमिया इतिहास पर प्रकाश डलाव। इस दौरान दोनों अतिथियों का अभिनन्दन किया गया । डॉ कुलधर सैकिया ने कहा
असमिया जाति के कण्ठस्वर असम साहित्य सभा का कोई घर नहीं है । उन्होंने कहा असम में भाषा बोलने वालों की संख्या घट सकती है, भौगोलिक क्षेत्र घट सकता है। लेकिन कभी भी जननी के मुख की भाषा खत्म नही हो सकती । उपाध्यक्ष मृणालिनी देवी ने कहा नई पीढ़ी को असम साहित्य सभा में दिलचस्पी लेनी चाहिए। साहित्य सभा का 105वां स्थापना दिवस सफल होगा यदि असमिया जाति की संस्कृति की महत्वता असम साहित्य सभा वास्तव में नई पीढ़ी को समझा सके।
इसके अलावा अन्य अतिथियों में डॉ परमानन्द राजवंशी , प्रह्लाद चन्द्र ताशा , पदुम राजखोवा , आमंत्रित अतिथियों में छात्र नेताओं में अभिवर्तन गोस्वामी , उदयन गोगोई , जितुल राजखोवा , जगदीश ब्रायिक के साथ परीक्षित दत्ता , चलंगथान लुथा , पवित्र बोरबोरा और पूर्ण राजखोवा ने भाग लिया और वक्तव्य दिया ।
ज्ञातव्य हो कि मारवाड़ी समाज की और से मारवाड़ी समेल्लन के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप नावका , समाजकर्मी प्रदीप खदरिया , नेटा के सलाहकार मनोज जालान , मारवाड़ी समेल्लन और अन्य समाजिक संस्थानों से जुड़े अजय कनोई ने भी असम साहित्य सभा के 105 ध्वजा रोहन कार्यक्रम में ध्वजारोहक के रूप में भाग लिया ।







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