गुवाहाटी। श्री परशुराम सेवा सदन ब्राह्मण भवन में पितृ पक्ष के पावन अवसर पर समस्त पितरों के उद्धार एवं कल्याणार्थ आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिवस विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कथा का आयोजन हुआ।
पांचवें दिवस प्रातःकालीन पूजा-अर्चना मुकेश जी भारद्वाज एवं पंडित श्री अरुण जी शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हुई। इस अवसर पर श्री बिहारी लाल, श्रीमती सुमित्रा देवी, श्री विनीत, श्रीमती पूनम, श्री अमित, श्रीमती शिल्पी देवी तोदी परिवार एवं दीपक पुगलिया परिवार ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भागवत भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके पश्चात दोपहर 3 बजे व्यास पूजन एवं श्रीमद् भागवत पूजन किया गया। स्वतंत्र व्यास पीठ से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक श्री नंदू जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं नंद महोत्सव की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि “ईश्वर और जीवात्मा के बीच का फैसला मात्र दो अंगुल का है।”
महाराज जी ने कहा कि नंद महोत्सव का अर्थ केवल चॉकलेट, दही, दूध और खिलौने उछालकर उत्सव मनाना नहीं है। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा हुआ है। सर्वप्रथम मनुष्य को अपने शरीर को मथुरा और हृदय को गोकुल बनाना होगा। जब हृदय रूपी गोकुल में बालकृष्ण को विराजमान किया जाता है, तभी वास्तविक नंद महोत्सव मनता है।
उन्होंने कहा कि पुत्र का अर्थ ईश्वर और सबका अर्थ प्रकृति है। ईश्वर और प्रकृति का मिलन ही वास्तविक उत्सव है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं मानव जीवन को आध्यात्मिक संदेश प्रदान करती हैं।
माखन चोरी लीला की व्याख्या करते हुए महाराज जी ने कहा कि परमात्मा साधारण माखन की चोरी नहीं करते। जब मां का हृदय माखन के समान कोमल हो जाता है, तब भगवान उस निर्मल मन की चोरी करते हैं। मन की चोरी ही माखन चोरी लीला का वास्तविक द्योतक है।
महाराज जी ने माखन चोरी लीला से संबंधित अत्यंत सुंदर पद का भावपूर्ण गायन एवं वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूमते, नाचते एवं आनंदित होते दिखाई दिए।
श्रीमद् भागवत कथा के दौरान “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आध्यात्मिक अनुभूति की।





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