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तिरंगा लहराने के नियमावली के संदर्भ में जागरूकता में दिखी कमी

अमित नागोरी

आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में केंद्र से लेकर राज्य तक और राज्य से लेकर जिला तक , तो वही जिलों से लेकर गाँवो तक हर घर तिरंगा की जो मुहिम छिड़ी है वो इस वर्ष देखने लायक है । इस बार असम के लोगो में भी एक अनोखी ऊर्जा देखने को मिली जो पिछले कई दशकों से नही दिखी । राज्य के विभिन्न स्थानों में तिरंगा लहराते दिखाई दिया । इस बार भय के आतंक से बाहर निकालकर आजादी का एक नया आलम देखने को मिला जो पहले कुछ व्यक्ति विशेष तक सीमित था । 

केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने अपने स्तर पर अनगिनत कार्यक्रम लिए जो आज से पहले कभी भी नही लिए गए थे । जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्र , नगरपालिका क्षेत्र तथा पंचायत इलाके में स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम लिए गए । एक उद्योगपति से लेकर श्रमिक तक , तो बस मालिको से लेकर कंडक्टर तो वही वाहन चालक से लेकर रिक्शा चालकों ने अपने अपने प्रतिष्ठान / वाहनों में तिरंगा लहराकर अपना देश प्रेम दर्शाया । 

इन सबके साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानो , वासगृहो में भी तिरंगा लहरता नजर आया । गोलाघाट  जिला प्रशासन ने तिरंगा लहराने के आह्वान पर हर सम्भव प्रयास किये और उनके प्रयासों में स्थानीय महिलाओ ने लाखों से भी अधिक तिरंगा बनाकर योगदान दिया । 

पर जिला प्रशासन  झंडा लहराने के नियमावली पर जागरूकता फैलाने के संदर्भ में भी यदि थोड़ा प्रयास करती तो प्रयास में चार चांद लग जाता । गोलाघाट के कई स्थानों पर तिरंगा की अवमानना करते हुए भी देखा गया । नगर एवं कई स्थानों में तिरंगा का दंड सीधा नही दिखा और झुका हुआ दिखाई दिया जो हमारे राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपमानजनक रहा । इसके अलावा कई बाइक चालको और साईकल चालको को गलत जगह तिरंगा बांध कर चलाते भी देखा गया ।  

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