गुवाहाटी। पिछले 28 वर्षों से विश्व प्रसिद्ध रामदेवरा मेले के दौरान लाखों भक्तों की सेवा में लीन रहने वाला गुवाहाटी (आसाम) सेवा संघ इस बार भी तन-मन-धन से सेवा करने के लिए तैयार है। गुवाहाटी (आसाम) सेवा संघ के प्रमुख एवं लोक गायक बद्री व्यास के अनुसार सेवा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। संघ के सभी साथी मेले में सेवा देने के लिए तैयार हैं। 17 सितंबर, भाद्रपद शुक्ल दूज, बाबा के जन्मदिन, को लगने वाले मेले में शामिल होने के लिए संघ का दल गुवाहाटी से 12 सितंबर को रवाना होगा और 15 सितंबर, अमावस्या, वार शुक्रवार को सुबह 11 बजे सेवा संघ नापासर (बीकानेर) से रुणिचा धाम के लिए रवाना होगा। बद्री व्यास के अनुसार पिछले 27 वर्षों की भांति इस बार भी मेले में उमड़ने वाली भीड़ के लिए संघ की तरफ से शीतल पेयजल की व्यवस्था रहेगी। 24-24 हजार लीटर के टैंकर बीकानेर के पास नापासर से रवाना होंगे तथा उरमूल डेयरी, बीकानेर से ठंडा पानी भरकर मेले में उमड़ने वाले लाखों भक्तों की सेवा में तत्पर रहेंगे। यह जल सेवा निरंतर 10 दिनों तक बाबा के मेले, भादवा सुदी दशमी तारीख 25 सितंबर 2023, सोमवार (बाबा का दर्शन) की आखिरी तारीख तक चलती रहेगी।
हालांकि मेले में प्रत्येक वर्ष ही जल सेवा लाखों भक्तों के साथ चलती है। बीकानेर से जैसलमेर तक तपती मरुभूमि में चलती लू के बीच अगर भक्तों को शीतल जल मिल जाए तो यह उनके लिए अमृत समान होता है। हर बार की तरह इस बार भी गुवाहाटी (आसाम) सेवा संघ का शीतल पेयजल के टैंकर भक्तों की भीड़ के साथ-साथ चलेंगे और लाखों पैदल यात्रियों की प्यास बुझाएंगे। ज्ञात हो कि बीकानेर से जैसलमेर मार्ग में जितने भी पैदल यात्री हैं, जैसे- पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के गंगानगर, रायसिंह नगर, कर्णपुर, सूरतगढ़, रावला, खाजूवाला, चूरू, सीकर, झुंझनूं, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, बीकानेर, डूंगरगढ़, रतनगढ़, छापर, सरदार शहर, राजलदेसर, सांडवा, बिदासर, सुजानगढ़, नवलगढ़, सालासर, कालू सहित अन्य गांव, कस्बों और शहरों के भक्तगण इसी मार्ग से रुणिचा के लिए पैदल यात्रा करते हैं। इन सभी भक्तों के सेवार्थ गुवाहाटी-(आसाम) सेवा संघ मानवीय सेवा का अनूठा परिचय देते हुए पूरी तन्मयता से उनकी सेवा में लगा रहता है। इतना ही नहीं, सैकड़ों छोटे-मोटे गांव व कस्बों के लोगों का हुजूम भी इसी मार्ग द्वारा अपनी यात्रा जारी रखता है।
बद्री व्यास और उनके सहयोगी असमिया भाई-बहनों के साथ भक्त कलाकारों की टोलियां लेकर नापासर-बीकानेर से रुणिचा की यात्रा करते हैं। यह सिलसिला पिछले 27 वर्षों से निरंतर जारी है। उन्होंने बताया कि इस सेवा में असम के कई भक्तों का वर्षों से सहयोग मिलता रहा है। बद्री व्यास ने बताया कि ‘नरसेवा-नारायण सेवा’ को बहुत हद तक हमने चरितार्थ करने की कोशिश की है। जो भी पैदल यात्री होते हैं, उनके लिए ठंडे पेयजल की व्यवस्था संघ पिछले 27 सालों से करते आ रहा है। ‘जल सेवा’ जिसे शास्त्रों में भी प्राणदायिनी माना गया है, उसका विशेष भार संघ ने इस बार भी उठाया है। जल सेवा ही नहीं, बल्कि पैदल भक्त यात्रियों के रख-रखाव व उनकी भावनाओं व कष्टों को संघ के सदस्यगण आत्मसात कर लेते हैं और जहां तक हो सके, उन्हें सहयोग करते हैं। ठंडे जल की पूरी व्यवस्था है, जो कि फ्रिजर टैंकरों द्वारा गांव नापासर बीकानेर से रुणिचा तक जाती है। ज्ञात हो मार्ग में पड़ने वाली तपती मरुभूमि में जल की बड़ी किल्लत रहती है।
बहरहाल, इस बार भी गुवाहाटी (आसाम) सेवा संघ ‘नरसेवा-नारायण सेवा’ को आत्मसात करते हुए अपने कर्ममय पथ पर आरूढ़ हो भक्तिभाव को बाबा के धाम में ‘भादुड़े री दुज ने चंदो करो प्रकाश, रामदेव बण आयसां, राखिज्यो विश्वास। खम्मा खम्मा हो धणिया, रुणिचेरा धणिया, थाने तो ध्यावे आखो मारवाड़ हो, आखो गुजरात हो, अजमालजी रा कंवरा’... बोल के साथ समवेत स्वरों को जीवंत करते रहें.. पूरे असमवासियों की शुभकामना इन सभी भक्तों के साथ है।








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