पूजा माहेश्वरी
नगांव। चलती ट्रेन में मानवता, साहस और त्वरित निर्णय का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला जब एक महिला यात्री ने गर्भवती महिला की मदद कर सुरक्षित प्रसव कराया।
मणिपुर निवासी सैटगिनथांग खोंगसाई अपनी पत्नी टिन्होइवाह हाओकिप के साथ चेन्नई से छुट्टियां मनाकर लौट रहे थे। उनकी फ्लाइट रद्द हो जाने के कारण उन्होंने ट्रेन संख्या 15629 नागांव एक्सप्रेस से यात्रा करने का निर्णय लिया। ट्रेन के कोच B4, सीट नंबर 45 और 46 पर यात्रा के दौरान, रंगिया स्टेशन से कुछ समय पहले टिन्होइवाह हाओकिप को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
स्थिति गंभीर देख पति ने कोच में मौजूद अन्य महिलाओं से मदद मांगी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। इसके बाद वे उसी कोच में सीट नंबर 11 पर यात्रा कर रहीं रेणु सोमानी के पास पहुंचे। पूरी स्थिति जानने के बाद रेणु सोमानी(धर्म पत्नी- भंवरलाल सोमानी)ने बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत मदद करने का फैसला किया।
जब रेणु सोमानी 2–3 मिनट में गर्भवती महिला के पास पहुंचीं, तब उन्होंने देखा कि शिशु का सिर लगभग बाहर आ चुका था। उन्होंने महिला को हिम्मत दी और सही तरीके से जोर लगाने के लिए कहा। मात्र 5 मिनट में ही सुरक्षित रूप से बच्चे का जन्म हो गया। महिला इतनी साहसी और संयमित थी कि आसपास के यात्रियों को काफी देर तक इस प्रसव की जानकारी तक नहीं हुई।
प्रसव के बाद लगभग 40 मिनट तक रेणु सोमानी नवजात बच्चे को गोद में लेकर बैठी रहीं, ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें। इसके बाद ट्रेन के रंगिया स्टेशन पहुंचने पर नर्स और डॉक्टर ट्रेन में आए। नर्स द्वारा गर्भनाल काटी गई और फिर मां व नवजात को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया।
इस पूरी घटना में रेणु सोमानी की संवेदनशीलता, साहस और मानवता ने सभी यात्रियों का दिल जीत लिया। चलती ट्रेन में बिना किसी चिकित्सकीय संसाधन के उन्होंने जो जिम्मेदारी निभाई, वह समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। रेणु सोमानी के इस साहसिक कार्य को सलाम करते हुए नगांव जिला माहेश्वरी सभा व माहेश्वरी महिला समिति, नगांव ने श्री. मती सोमानी के निवास पर पहुंच कर उनका फुलाम गामोछा से सम्मानित किया ।







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