लखीमपुर से राजेश राठी और ओम प्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
लखीमपुर 29 दिसंबर 2025: पौष मास की पावन बेला तथा अंग्रेजी वर्ष के समापन की मंगल संध्या पर धर्मनगरी लखीमपुर के मारवाड़ी समाज द्वारा स्थानीय श्री श्री सीताराम जी ठाकुरबाड़ी मंदिर प्रांगण में एक अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं भक्तिरस से परिपूर्ण पौष बड़ा भोग एवं भजन संध्या का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 6:30 बजे ठाकुरजी को पौष बड़ा भोग अर्पित कर किया गया।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष मास में भगवान को अर्पित किया जाने वाला पौष बड़ा भोग विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इसी धार्मिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से धर्मनगरी लखीमपुर शहर में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। मंदिर परिसर भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की आस्था से अलौकिक वातावरण में परिवर्तित हो गया। भजन संध्या के दौरान राजस्थान के नोखा निवासी सुप्रसिद्ध भजन प्रवाहक दिनेश हिन्दुस्तानी ने अपनी सुमधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को प्रभु भक्ति में सराबोर कर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत एक से बढ़कर एक राम, कृष्ण और ठाकुरजी की महिमा से जुड़े भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। उक्त कार्यक्रम में लखीमपुर निवासी देवांशु डीडवानिया ने भी अपनी सशक्त एवं भावात्मक भजन प्रस्तुति से भक्तों के हृदय को स्पर्श किया और खूब सराहना बटोरी। वहीं नोखा, राजस्थान के जोरहाट निवासी भजन गायक प्रीतम पारीक ने अपनी सुमधुर गायकी और भक्तिरस से परिपूर्ण भजनों के माध्यम से संध्या को और भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भजनों के दौरान मंदिर प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आध्यात्मिक आनंद स्पष्ट झलक रहा था। लखीमपुर मारवाड़ी समाज ने इस कार्यक्रम की सफलता पर सभी कलाकारों, मंदिर प्रबंधन, सहयोगकर्ताओं एवं उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं पूर्ण भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ, जिसे उपस्थित जनसमूह ने मुक्त कंठ से सराहा।








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