गुवाहाटी, छत्रीबाड़ी निवासी 97 वर्षीया सरस्वती देवी पारीक ने असम विधानसभा चुनाव में अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और कर्तव्यनिष्ठा सचमुच सराहनीय है। अपने पड़पोते के सहारे वे आर्य विद्यापीठ कॉलेज परिसर स्थित मतदान केंद्र तक पहुँचीं और पूरे गर्व के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उनके साथ उनकी चार पीढीयो के सदस्यों ने भी मतदान किया।
उनका यह साहसिक कदम न केवल उनके मजबूत संकल्प को दर्शाता है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा भी है। जहाँ आज कई लोग छोटी-छोटी असुविधाओं के कारण मतदान से दूरी बना लेते हैं, वहीं दादी सरस्वती देवी ने यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
उनका यह संदेश स्पष्ट है कि हर नागरिक का एक-एक वोट देश के भविष्य को आकार देता है। हमें भी उनसे प्रेरणा लेकर लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए और अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करना चाहिए।








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