नई दिल्ली। हर वर्ष 20 अगस्त को अक्षय ऊर्जा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाता है। इसे राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिवस पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है और देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश देता है।
क्यों मनाया जाता है अक्षय ऊर्जा दिवस?
अक्षय ऊर्जा दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को ऐसे ऊर्जा स्रोतों के प्रति जागरूक करना है, जो प्राकृतिक रूप से लगातार उपलब्ध होते हैं और जिनका उपयोग पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।
सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और बायोमास ऊर्जा इसके प्रमुख उदाहरण हैं। सरकार ने इस दिवस के माध्यम से लंबे समय से अक्षय ऊर्जा प्रणालियों और उपकरणों के दैनिक जीवन में उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
20 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है?
20 अगस्त पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती है। भारत सरकार के तत्कालीन गैर-पारंपरिक ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2004 में 20 अगस्त को ‘राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस’ के रूप में मनाने की पहल की थी। इसका उद्देश्य देशभर में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और इसके लाभों को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करना था।
वर्ष 2004 में इसके पहले राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के दौरान नई दिल्ली में स्कूली बच्चों ने मानव श्रृंखला बनाकर अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया था। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में रैलियां, निबंध, चित्रकला, क्विज, वाद-विवाद और अन्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
अक्षय ऊर्जा क्यों है महत्वपूर्ण?
ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के बीच स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोत प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होते हैं और इनका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
अक्षय ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और टिकाऊ विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत में बढ़ रही अक्षय ऊर्जा क्षमता
भारत ने पिछले वर्षों में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाई है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक देश में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 1,62,152 मेगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 57,443.39 मेगावाट थी।
इन आंकड़ों से देश में सौर और पवन ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते महत्व का पता चलता है।
अक्षय ऊर्जा दिवस का संदेश
अक्षय ऊर्जा दिवस केवल एक दिवस मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को समझने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने का अवसर है। सौर ऊर्जा का उपयोग, ऊर्जा की बचत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे-छोटे कदम भी स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में योगदान दे सकते हैं।
इस अक्षय ऊर्जा दिवस पर आइए, स्वच्छ, सुरक्षित और सतत ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुरक्षित रखने का संकल्प लें।










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