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अनुभूति लाइब्रेरी ने मनाया एक साल का सफर: किताबों के साथ बढ़ता आत्मविश्वास और समुदाय का अपनापन

 


अनुभूति लाइब्रेरी: विकास, समुदाय और उत्सव का एक वर्ष


गुवाहाटी. अनुभूति लाइब्रेरी, जो पूर्णत: निःशुल्क है और कमला पोद्दार विद्याज्योति फाउंडेशन तथा द ब्लू लैडर ट्रस्ट की संयुक्त पहल है, ने एक साल में सहयोग और सामुदायिक निर्माण की एक सुंदर यात्रा पूरी की । जो कभी एक छोटा सा सपना था, वह अब 180 से अधिक सदस्यों — आसपास के कम संसाधन वाले इलाकों के बच्चों — वाला एक जीवंत केंद्र बन चुका है। ये बच्चे यहाँ न केवल पढ़ते हैं, बल्कि लाइब्रेरी की गतिविधियों और निर्णयों में सक्रिय भागीदार भी बन गए हैं।


सिर्फ एक साल में तीन हजार से अधिक किताबें जोड़ीं, अनेक रचनात्मक सत्र आयोजित किए और कई संस्थाएँ तथा संसाधन व्यक्ति हमारे साथ जुड़े, जिन्होंने अपना समय, कौशल और स्नेह साझा किया। इन दीवारों के अंदर बच्चों ने पढ़ने की खुशी, स्वयं को अभिव्यक्त करने का आत्मविश्वास और बड़े सपने देखने की हिम्मत पाई। कला, शिल्प, रंगमंच, संगीत और नृत्य के माध्यम से उन्होंने सोचने, कल्पना करने और सहयोग से काम करने की कला सीखी। बच्चों के लिए कई परिचयात्मक भ्रमण भी आयोजित किए ताकि वे सीखने को अपनी रोज़मर्रा की दुनिया से जोड़ सकें। वे पक्षी देखने गए, असम स्टेट म्यूज़ियम का भ्रमण कर क्षेत्र की संस्कृति और इतिहास से परिचित हुए, और चिड़ियाघर जाकर जंगली जीवन और पिंजड़े में रखे जानवरों के बीच के अंतर पर विचार किया। विरासत स्थलों पर चलना, पेड़ों के बीच पेंटिंग करना और प्रकृति को कला व निरीक्षण के जरिए अनुभव करना—हर अनुभव ने उनकी समझ और जिज्ञासा को नया आयाम दिया।


अनुभूति लाइब्रेरी अपनी चार दीवारों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह उसके आगे भी अपने पंख फैला रही है। रविवार को स्थानीय पार्कों में आयोजित हमारी पॉप-अप लाइब्रेरी ने 300 से अधिक लोगों तक कहानियाँ पहुँचाईं और उन्होंने शांत जगहों को जीवंत स्थानों में बदल दिया जहाँ लोग हँसे, सीखे और नए दोस्त बनाए। लाइब्रेरी अब परिवारों के लिए भी एक साझा जगह बन चुकी है जहाँ माताएँ अपने बच्चों के साथ पढ़ती हैं और बच्चे अपने पसंदीदा किताबें जोर से पढ़कर अपने मित्रों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।


साल भर में 30 से अधिक थीम-आधारित प्रदर्शनियों ने किताबों का सृजनात्मक उत्सव मनाया, और बच्चे कार्यक्रमों की योजना बनाकर, स्थान को सजाकर और किताबों की देखभाल करके मालिकाना भावना लेकर चले। यही बढ़ता हुआ अपनापन और जिम्मेदारी अनुभूति लाइब्रेरी को सच्चे मायने में एक घर बनाता है। बड़ी प्रसन्नता और कृतज्ञता के साथ अनुभूति लाइब्रेरी की प्रथम वर्षगांठ मनाई। इस उत्सव में उन बच्चों को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया जिन्होंने पढ़ाई के मील के पत्थर हासिल किए, और उसके बाद बच्चों ने अपने अनुभव भावपूर्ण रूप से साझा किए। कई बच्चों ने बताया कि यह पुस्तकालय पढ़ने की जगह से कहीं अधिक बन गया है—यह प्रेम, दोस्ती, प्रोत्साहन और अपनापन से भरा एक स्थान है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय का हिस्सा बनने से उन्हें सक्षम और आत्मविश्वासी महसूस हुआ है। यह वह जगह है जहाँ उन्हें अपनी प्रतिभा व्यक्त करने, क्षमताओं का अन्वेषण करने और अपनी आंतरिक आवाज़ खोजने के अवसर मिलते हैं।


कुछ बच्चों ने साझा किया कि पुस्तकालय में आने के बाद वे अधिक खुले तौर पर बोलने लगे हैं, दूसरों से बातचीत करने लगे हैं और अपनी पसंद व रुचियों को पहचानने लगे हैं। अब वे स्वयं को सशक्त और आत्म-निश्चित व्यक्ति के रूप में देखते हैं। अनुभूति लाइब्रेरी सचमुच वह स्थान बन गया है जहाँ हर बच्चे को जैसे वह है, वैसे ही स्वीकार किया और सराहा जाता है।


अनुभूति लाइब्रेरी की उत्पत्ति कमला पोद्दार विद्याज्योति फाउंडेशन के आनंद पोद्दार और द ब्लू लैडर ट्रस्ट की प्रेरणा अग्रवाल की साझी दृष्टि और सपने से हुई। उनका आरंभ से ही पुस्तकालय का मार्गदर्शन और समर्थन रहा और इसे आज जो रूप मिला है, उसमें उनका बड़ा योगदान है। इस उत्सव की शोभा अनेक शुभचिंतकों और समर्थकों से बढ़ी, जो समाज में ऐसे और समावेशी तथा आनंददायी सीखने के स्थान बनाने में विश्वास रखते हैं। अतिथियों में एल. एन. अग्रवाला, अक्षय पोद्दार, निता अग्रवाल, सरिता मानत्री, श्रीमती गरिमा अग्रवाल, अनुप जसरासरिया , मोहिका जसरासरिया, अक्षिता अजितसरिया, सान्युक्ता, सुरेन्द्र खेमका, घनश्याम लडिया तथा पुस्तकालय के अन्य मित्र शामिल थे। उन्होंने न केवल अपनी प्रशंसा और शुभकामनाएँ साझा कीं, बल्कि हमारे प्रयासों को प्रोत्साहित किया और पुस्तकालय को बढ़ाकर अधिक बच्चों तक पहुँचाने के लिए अपनी निरंतर समर्थन की प्रतिज्ञा भी की।


हम उन सभी के प्रति गहराई से कृतज्ञ हैं जिन्होंने इस दृष्टि का समर्थन और विश्वास किया है। हमें आशा है कि अनुभूति लाइब्रेरी आगे भी आत्मविश्वास, कल्पना और समुदाय को पोषित करती रहे—एक कहानी, एक पाठक और एक दोस्ती के साथ समय-समय पर।


यह पुस्तकालय निम्न पते पर स्थित है:

मकान संख्या 30A, बानिकांत स्कूल के पास, माधवदेबपुर, रेहाबारी, गुवाहाटी-8

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