रमेश मुन्दड़ा
होजाई। रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के श्रीमंत शंकरदेव कैंपस में बृहस्पतिवार को एक ऐसी नई पहल शुरू हुई, जो समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। 'ग्रेस कॉर्नर' नामक यह अभियान विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष स्थान पर शुरू किया गया है, जहाँ नए और पुराने कपड़े, जूते, किताबें, स्टेशनरी और अन्य दैनिक आवश्यक वस्तुओं का दान और वितरण किया जाएगा।यह पहल न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देगी, बल्कि समुदाय के लिए एक वास्तविक आशा का केंद्र भी बनेगी। ग्रेस कॉर्नर को एक नियमित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत चलाया जाएगा और हर महीने की पहली व तीसरी गुरुवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यह जरूरतमंदों के लिए खुला रहेगा। इससे दान की वस्तुओं का सही तरीके से चयन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित होगा और मदद उन तक पहुँचेगी जो वास्तव में इसकी जरूरत महसूस करते हैं।यह अभियान शिक्षा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महात्मा गांधी के उस विचार को आगे बढ़ाते हुए कि सेवा से ही व्यक्ति की आत्मा शुद्ध होती है, ग्रेस कॉर्नर छात्रों को दया, साझेदारी और जिम्मेदारी की सीख देगा, जो कक्षा से परे की जीवन शिक्षा है।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मणबेंद्र दत्त चौधरी ने गुरुवार को ग्रेस कॉर्नर का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर अकादमिक रजिस्ट्रार डॉ. संदीप रत्ना और रजिस्ट्रार (आई/सी) के साथ-साथ सभी शिक्षक और कर्मचारी भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम ने संस्थान के भीतर समुदाय देखभाल और सहानुभूति को मजबूत करने की दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।ग्रेस कॉर्नर न केवल जरूरतमंदों के लिए एक आशीर्वाद बनेगा, बल्कि विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए भी एक अनुभव और जीवन की वास्तविकता से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। यह पहल विश्वविद्यालय को न केवल ज्ञान का केंद्र, बल्कि मानवता का भी केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







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