श्री राम वनवास प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
रंगिया से अरुणा अग्रवाल की रिपोर्ट।
रंगिया महिला मंडल के तत्वावधान मे स्थानीय पंचायती धर्मशाला प्रांगण में चल रही 9 दिवसीय श्री राम कथा के पांचवें दिन रविवार को कथा वाचक राष्ट्रीय संत स्वामी नवराज प्रपन्न जी महाराज (हरिद्वार) ने अपनी सुमधुर वाणी से भक्तों को श्री राम वनवास का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान राम के वनवास के सजीव वर्णन ने सभी श्रोताओं को भावुक कर दिया और उनकी आँखों में आँसू आ गए। कथा शुरू करते हुए स्वामी नवराज प्रपन्न जी महाराज ने कहा कि भगवान राम ने अपने वंश की मर्यादा और पिता के वचन को निभाने के लिए खुशी-खुशी अपना राज्य त्याग दिया और वनवास चले गए। उन्होंने बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ की सलाह पर भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारी कर रहे थे। अयोध्यावासी इस बात से बहुत खुश थे।
इसी बीच, मंथरा ने सबसे छोटी रानी कैकेयी के मन में द्वेष की भावना भर दी। कैकेयी ने राजा दशरथ से, उनके द्वारा दिए गए दो वरदानों के बदले में, यह माँग की कि राम को चौदह साल के लिए वनवास भेजा जाए और भरत को अयोध्या का राजा बनाया जाए। कैकेयी की इस माँग से राजा दशरथ बहुत दुखी हुए।
जब भगवान राम को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने और वनवास जाने का फैसला किया। लक्ष्मण ने भी उनके साथ जाने की जिद की, और अपनी माँ सुमित्रा से अनुमति मिलने के बाद, भगवान राम उन्हें अपने साथ ले जाने के लिए सहमत हो गए। माता सीता भी उनके साथ वन के लिए चली गईं।







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