रमेश मुंदडा
होजाई: होजाई जिला मुख्यालय श्रीमंत शंकरदेव नगर के निकट जोरापुखुरी में बंगाली परिषद असम का 34वां स्थापना दिवस आज धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में बंगाली परिषद के मुख्य सलाहकार एवं होजाई के पूर्व विधायक शिलादित्य देब ने कहा कि हमारी मातृभाषा दो हैं—एक बंगाली और दूसरी असमिया। बंगाली भाषा वह है जो माँ के मुख से सुनकर हमने सीखी, जबकि असमिया वह भाषा है जो हमें इस पवित्र भूमि से मिली है। यह भावना बंगाली परिषद के हर सदस्य के मन में बसी है और इसी भावना के साथ वे जन्मभूमि के सर्वांगीण विकास और समाज कल्याण के लिए काम करते आ रहे हैं।शिलादित्य देब ने कहा कि बंगाली समाज असमिया समाज का एक बड़ा अंग है और असम की सुरक्षा एवं विकास के लिए बंगाली परिषद आर्थिक, सामाजिक और राज्य स्तरीय विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी को आगंतुक मकर संक्रांति (भोगाली बिहू) की शुभकामनाएँ दीं।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका थे, जिन्होंने असमिया और बंगाली समुदाय के बीच सद्भाव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के 'वंदे मातरम' शब्द भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बने थे। उन्होंने बताया कि असमिया भाषा और संस्कृति ने मुगल आक्रमण, भूकंप, बाढ़ जैसी विभिन्न चुनौतियों को पार कर आज भी अपनी पहचान बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि बंगाली और असमिया समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।कार्यक्रम में ताराना कलाकार समूह, दिशा दिशा कलाकार समूह और अन्य कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें सभी ने सराहा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, पूर्व विधायक शिलादित्य देब, होजाई के जिला आयुक्त विद्युत बिकाश भागवती, असम बंगाली परिषद के अध्यक्ष शांतनु सन्याल, होजाई जिला अध्यक्ष नारायण घोष, कार्यकारी अध्यक्ष कानू रंजन दास और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।कार्यक्रम में हजारों सदस्यों ने भाग लिया और बंगाली परिषद असम के विकास और असम की एकता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।







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