गुवाहाटी। पश्चिमी बंगाल के अलीपुरद्वार में एक महंत की नृशंस हत्या के विरोध में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा एवं सनातनी हिन्दू आर्मी के संयुक्त नेतृत्व में एक विशाल, अनुशासित एवं संगठित विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन साधु-संतों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर सनातन समाज की सामूहिक चेतना का सशक्त उद्घोष था।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का नेतृत्व सनातनी हिन्दू आर्मी, असम के सेना प्रमुख स्वामी प्रसुराम गिरी महाराज ने किया। उनके आह्वान पर साधु-संत, महंत, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में सनातनी समाज के लोग एक मंच पर एकत्र हुए और अलीपुरद्वार के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शासन-प्रशासन को इस जघन्य घटना पर गंभीर, त्वरित एवं निर्णायक कार्रवाई के लिए आगाह करते हुए स्पष्ट कहा गया कि साधु समाज की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
इस अवसर पर स्वामी परशुराम गिरी महाराज ने प्रतीकात्मक रूप से तलवार के माध्यम से चेतावनी देते हुए कहा कि सनातन परंपरा शास्त्र के मार्ग पर चलना सिखाती है, किंतु यदि अन्याय की सीमा लांघी जाती है और साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तो आत्मरक्षा का संकल्प भी उतना ही दृढ़ रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धैर्य हमारी शक्ति है, दुर्बलता नहीं। हमारी न्याय की मांग शांतिपूर्ण है, परंतु इसकी अनदेखी की कीमत गंभीर हो सकती है।
स्वामी जी ने प्रशासन से त्वरित, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक ठोस और प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना अनिवार्य है।
सनातनी हिन्दू आर्मी के अध्यक्ष दिनेश पारीक ने कहा कि स्वामी परशुसराम गिरी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि सनातन चेतना के प्रखर, निर्भीक और निर्णायक नेतृत्व के प्रतीक हैं। उनके नेतृत्व में अलीपुरद्वार में हुआ यह विरोध प्रदर्शन यह स्पष्ट संदेश देता है कि सनातनी आस्था, सम्मान और सुरक्षा के प्रश्न पर सनातन समाज संगठित होकर, अनुशासित ढंग से और निर्णायक रूप में अन्याय के विरुद्ध खड़ा होगा।







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