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जो शुरू हुआ चाय बागान से, वो ताज होटल तक कैसे पहुँचा? पवन अग्रवाला की पुस्तक 'YES WE CAN' ने बयां किया संघर्ष से सफलता का सफर

 

चाय बागान की मिट्टी से निकलकर टेक्नोलॉजी लीडरशिप के शिखर तक पहुँचा एक सपना, जब शब्दों में ढला तो उसका नाम बना “YES WE CAN”। पवन अग्रवाला की पहली पुस्तक का भव्य लोकार्पण गुवाहाटी के विवांता ताज में एक यादगार आयोजन के रूप में सामने आया। यह पुस्तक उस सफर की कहानी है, जहाँ सीमित संसाधन, कठिन हालात और अनगिनत चुनौतियों के बीच विश्वास कभी डगमगाया नहीं। चाय बागान से ताज तक का यह सफर सिर्फ़ स्थानों का बदलाव नहीं, बल्कि सोच, संघर्ष और संकल्प की ऊँचाइयों का प्रतीक है। कार्यक्रम में उद्योग और कॉरपोरेट जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया, जहाँ पवन अग्रवाला की यात्रा को न केवल सराहा गया, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया गया। “YES WE CAN” उन लाखों युवाओं की आवाज़ बनकर उभरी, जो साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सपने देखते हैं। यह पुस्तक विमोचन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह साबित करने का मंच था कि अगर इरादे मज़बूत हों, तो चाय बागान से निकलकर भी वर्ल्ड टेक लीडरशिप तक पहुँचा जा सकता है।

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