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रोहा आमनिशाली में हथकरधा बुनाई के जरिए महिलाओं ने दिखाया स्वाभिलंबिता का उत्कृष्ट निदर्शन


सोयल खेतान, रोहा


 समावाय ने राज्य सरकार दिए5हजार फुलाम गमछे।


रोहा आमनिशाली में हथकरधा बुनाई के जरिए स्वाभिलंबिता का उत्कृष्ट निदर्शन दिखा सभी के लिए आदर्श बन चुकी ही महिलाएं ।

    हथकरधा बुनाई के जरिए भविष्य का सपना देखा है एक दो नही 390महिलाओं ने।

     रोहा आमनिशाली में महिलाओं ने स्थापित किया है हछकरधा बुनाई शिल्प का एक वृहत उद्योग । आमनिशाली में उद्यमी महिलाओं ने समवाय समिति गठन कर हथकरधा बुनाई शिल्प विप्लव जाग्रत कर महिलाओं ने दिखाया स्वाभिलंबिता का उत्कृष्ट निदर्शन दिखाया और सभी के लिए आदर्श बन चुकी है।

    महिलाओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2010में आमनिशाली की रानू दास के नेतृत्व में प्रथम 10 महिलाओं ने केवल 2 हथकरधा के जरिए बुनाई कार्य शुरु किया पस्चात उत्पादन उत्साहजनक और ग्राहकों से समादर और प्रेरणा प्राप्त कर उसी वर्ष महिलाओं ने "लखिमी" नामक बुनाई समवाय समिति का गठन किया और 6 महिने के भीतर समवाय ने असम सरकार हथकरधा और वस्त्रशिल्प विभाग से पंजीकृत हो गयी। वर्तमान समवाय समिति के सदस्याओं की संख्या 105 है। वर्ष 2017 में समवाय समिति ने प्राप्त किया था बुनाईशिल्प का एक प्रकल्प और महिलाएं काफी प्रोत्साहन प्राप्त कर क्षेत्र में हथकरधा बुनाई विप्लव की सूचना कर दी। वर्तमान समवाय समिति सदस्याओं की संख्या 105 है परंतु वृहतर क्षेत्र में हथकरधा बुनाई में कुल 390 महिलाएं जौडी हुई है और अच्छे से अपने परिवार का लालन पोषण करने में समर्थ है।

  समवाय समिति की और से प्रत्येक महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ ही एक एक हथकरधा, सूता और गृह दे संस्थापन दिया गया है। घर घर में महिलाएं वर्तमान व्यस्त रहती बुनाई में। साथ ही समवाय समिति के संपादीका रानू दास अपने घर में 10 हथकरधा स्थापन कर 10 पुरुष, महिलाओं को संस्थापन दिया है । महिलाएं उत्पादन कर रही है फुलाम गमछा, कॉटन के चादर, मेखला, शॉल, पद्मिनी, एडी चादर, नूनी सहित विभिन्न उत्कृष्ट सामग्री।महिलाएं घर घर में सामग्री तैयार कर समवाय में जमा देती है और समवाय समिति नगांव, गुवाहाटी सहित विभिन्न प्रांतों में सामग्री बिक्री कर जो राशी प्राप्त करती है और महिलाओं के बिच प्राप्य राशी प्रदान करती है। साथ ही उक्त समवाय समिति के जरिए बनाये हुवे 5 हजार फुलाम गमछा राज्य सरकार दिए थे और सरकार से फुलाम गमछा के मुल्य प्राप्त किया था समवाय समिति ने। ईसलिए हथकरधा के जरिए महिलाओं ने संस्थापन प्राप्त होने के साथ ही स्बाभिलंबिता का उत्कृष्ट निदर्शन दिखाया है और सभी के आदर्श बन चुकी है।

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