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होजाई के होनहार कवि अंकुर ज्योति बोरा की पहली काव्यकृति 'अधोली सपोन' का विमोचन

 


रमेश मुन्दड़ा 


होजाई: कठिनाइयों से जूझते हुए भी सपनों को हकीकत में बदलने वाले दिव्यांग कवि अंकुर ज्योति बोरा ने अपनी पहली काव्य संग्रह 'अधोली सपोन' का विमोचन होजाई के गौरानगर स्थित 'ओरजा इको फार्म' में मंगलवार को किया। बचपन से ही शारीरिक चुनौतियों, माता-पिता के असामयिक निधन और आर्थिक तंगी का सामना करने वाले अंकुर ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से न केवल साहित्य की दुनिया में कदम रखा, बल्कि युवाओं के लिए जीवंत प्रेरणा बन गए।


कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय कलाकार जूबिन गर्ग को भावभीनी श्रद्धांजलि से हुई व उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया। हाजी अनफर अली कॉलेज, डबका के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. हाशिनुर सुल्तान की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव विश्वविद्यालय के भौतिकी विभागाध्यक्ष और 2012 साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता डॉ. कमल कुमार तांती ने पुस्तक का विमोचन किया।


मंच पर उपस्थित गरिमामयी अतिथियों में उपन्यासकार सार्मिष्ठा प्रीतम, होजाई गर्ल्स कॉलेज की सेवानिवृत्त सहायक प्रोफेसर डॉ. घोनाकांता सैकिया, होजाई जिला साहित्य सभा के सचिव अच्युत ठाकुरिया तथा रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के असमिया विभाग के सहायक प्रोफेसर देवराज मिली शामिल थे। सभी ने अंकुर की सरल भाषा, सटीक शब्द चयन, मानवतावादी भाव और आशावादी विषयवस्तु की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


अपने मृतक माता-पिता की स्मृति को समर्पित इस संग्रह को अंकुर ने अपने गुरु देवराज मिली को अर्पित किया। उन्होंने नवकांता बरुआ की 'पोला' और नीलमणि फुकन की 'ब्रह्मपुत्रर सूर्यास्त' जैसी कविताओं के माध्यम से गुरु के प्रभाव को श्रेय दिया। कार्यक्रम के रोचक क्षणों में अच्युत ठाकुरिया का अंकुर की कविता 'मरम नंगा चाहिया खरोला' का भावपूर्ण पाठ, प्रयग्ना तालुकदार का नृत्य और संजिता देवी का बोरगीत गायन शामिल रहा। कवि-नाटककार रफीकुल हुसैन ने 'रातिर बोरगी' से समापन किया।


आयोजक यदुमणि गोगोई और कवि अंकुर ने सभी का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है, देवराज मिली , अंकुर के गुरु हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम का संचालन किया। अंकुर ज्योति बोरा का यह सफर न केवल साहित्य की नई ऊंचाइयों का प्रतीक है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत जो चुनौतियों से नहीं डरता।



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