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श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी, सरभोग के मुख्य पुजारी पं. मुक्तिनाथ पांडेय का निधन, समाज को अपूरणीय क्षति



सरभोग, श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी, सरभोग के मुख्य पुजारी पं. मुक्तिनाथ पांडेय का 9 फरवरी की संध्या उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ होने के कारण उन्हें फखरुद्दीन अली कॉलेज एवं अस्पताल, बरपेटा में भर्ती कराया गया था, जहाँ उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

निधन के उपरांत उनका पार्थिव शरीर श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी परिसर, सरभोग स्थित उनके निवास स्थान लाया गया। 10 फरवरी की प्रातः उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास से प्रारंभ हुई, जो सरभोग बाजार होते हुए सरभोग श्मशान घाट पहुँची, जहाँ विधि-विधान के साथ उनके अंतिम संस्कार सम्पन्न किए गए।

पं. मुक्तिनाथ  पांडेय के अंतिम दर्शन हेतु सरभोग एवं आसपास के क्षेत्रों से विभिन्न जाति, वर्ग एवं समाज के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी समिति, चेंबर ऑफ कॉमर्स, सरभोग शाखा तथा अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। चेंबर ऑफ कॉमर्स, सरभोग शाखा के आह्वान पर सम्मान स्वरूप सरभोग क्षेत्र में दुकान–प्रतिष्ठान बंद रहे, जो पंडित जी के प्रति समाज के सम्मान एवं आदर को दर्शाता है।

पंडित जी सरभोग एवं समीपवर्ती क्षेत्रों में एक सरल, विद्वान, धर्मनिष्ठ एवं सेवाभावी व्यक्तित्व के रूप में अत्यंत लोकप्रिय थे। उल्लेखनीय है कि उनका परिवार विगत लगभग 90 वर्षों से श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी की सेवा करता आ रहा है। ठाकुरबाड़ी के निर्माण काल से ही उनके पिताजी, जो एक प्रख्यात विद्वान एवं श्री हिंदी विद्यालय (ठाकुरबाड़ी परिसर, सरभोग) के शिक्षक थे, ने दैनिक पूजा-अर्चना एवं सेवा का दायित्व निभाया। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पं. मुक्तिनाथ  पांडेय ने भी जीवन पर्यंत पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ ठाकुरबाड़ी की सेवा की।

उनके निधन पर मारवाड़ी समाज, सरभोग, तथा बरपेटा रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पं. मुक्तिनाथ जी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार—धर्मपत्नी, तीन पुत्र–पुत्रवधू, दो पुत्रियाँ–दामाद, पौत्र एवं पौत्री—को छोड़ गए हैं।

उनका निधन न केवल ठाकुरबाड़ी, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका सादगीपूर्ण जीवन, धार्मिक आस्था एवं सेवा-भाव सदैव स्मरणीय रहेगा।

यह जानकारी श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी, सरभोग के अध्यक्ष हरिकिशन माहेश्वरी द्वारा प्रेषित की गई।

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