प्रवेश मिश्र
मानवता जिंदा है और कुशल भी बस फर्क इस बात का है कि वह हमारे मन में एहसास हो। आमतौर पर माना जाता है कि पुलिस निचले तबके के लोगों के लिए बहुत ही क्रूर है और अमानवीय भी। खास तौर पर रिक्शेवाले और ठेले वालों के लिए। हम सब ने अपने जीवन काल में कहीं ना कहीं यह देखा होगा पर चंद पुलिसवालों की वजह से सारे पुलिस वालों की छवि को धूमिल नहीं किया जा सकता। दरअसल सोशल मीडिया के माध्यम से आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसके बाद यह लेख लिखने पर मैं मजबूर हो गया। असम के टंगला के स्थानीय श्री मनोज शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसा पोस्ट शेयर किया है जिसमें एक ट्रैफिक पुलिस को एक ठेले वाले को मदद करते हुए देखा जा रहा है। यह दृश्य वहां के स्थानीय सोशल मीडिया पेज के माध्यम से अपलोड किया गया। आमतौर पर ठेले वाले और रिक्शे वाले को प्रताड़ित करने वाले ट्रैफिक पुलिस को इस तरह देख एक सुखद अनुभूति का एहसास हुआ जिससे यह पता चलता है कि मानवता सकुशल है। दीपू हजारिका नामक एक व्यक्ति को इस फोटो का श्रेय दिया गया। मैं आशा करता हूं कि हम सभी में मानवता का और एक दूसरे की सहायता करने का भाव हमेशा जिंदा रहे। यह पुलिस कौन हैं उनका नाम तो मुझे नहीं पता पर राइस प्लस की ओर से मैं अपना धन्यवाद ज्ञापित करना चाहूंगा।






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