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सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी पर टियोक में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की धूम




टियोक, असम के महान संगीतकार, गायक, गीतकार एवं विश्वविख्यात कलाकार सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर मंगलवार को टियोक सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर महान कलाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके अमर गीतों और कालजयी योगदान को स्मरण किया।


इस अवसर पर जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई ने डॉ. भूपेन हजारिका के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। टियोक विधानसभा क्षेत्र के विधायक विकास सैकिया तथा मरियानी के विधायक रूपज्योति कुर्मी ने भी महान कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित की।


टियोक क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं छात्र संगठनों तथा साहित्यिक संस्थाओं की ओर से भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। टियोक आंचलिक छात्र संस्था, जातीयतावादी युवा छात्र परिषद, नागरिक सभा, महिला समिति, पूर्वोत्तर प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की महिला शाखा तथा असम साहित्य सभा सहित विभिन्न संगठनों ने डॉ. हजारिका के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। कई स्थानों पर उनके अमर गीतों एवं संगीत कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।


मारवाड़ी सम्मेलन की टियोक शाखा ने दी श्रद्धांजलि


पूर्वोत्तर प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की टियोक शाखा की ओर से भी विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। सम्मेलन के सदस्यों ने डॉ. भूपेन हजारिका के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में सम्मेलन के बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।


सम्मेलन के सचिव बीजू कुमार तुनवाल ने कहा कि सुधाकंठ भूपेन हजारिका की अमर आवाज और उनकी रचनाएं आज भी असम के जनमानस को प्रेरित करती हैं। उनकी जन्म शताब्दी पर उन्हें याद करना केवल एक महान कलाकार को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनकी मानवीय संवेदना, सामाजिक चेतना और विश्वबंधुत्व के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है।


उन्होंने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका ने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से असम की संस्कृति, लोकजीवन तथा मानवीय संवेदनाओं को देश-विदेश तक पहुंचाया। उनकी रचनाएं आज भी समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही हैं।


आऊनीआटी विश्वविद्यालय में भी मनाई गई जयंती


वहीं, आऊनीआटी विश्वविद्यालय में डॉ. भूपेन हजारिका की 101वीं जयंती मनाई गई। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं सत्राधिकारी डॉ. पीताम्बर देव गोस्वामी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका को विश्वमानवता का महान चिंतक बताते हुए कहा कि उनके योगदान को देखते हुए उन्हें ‘मानव रत्न’ सम्मान से विभूषित किया जाना चाहिए।


कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में लोगों ने सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका के अमर संगीत, कला, विचार एवं मानवीय संदेश को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

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