गुवाहाटी। राज्य के वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि मामलों के मंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने सोमवार को कहा है कि हम विधानसभा में कानून पास करके राज्य की शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहते हैं। व्यक्तिगत मदरसा को लेकर हम कोई भी निर्णय नहीं ले सकते हैं लेकिन सरकारी मदरसा और संस्कृत विद्यालय (टोल) के संबंध में सरकार फैसले ले सकती है।
डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने आज जनता भवन (असम सचिवालय) के मुख्यमंत्री सभागार में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1934 से असम में मदरसों की स्थापना की गयी थी। सरकारी मदरसों के पाठ्यक्रमों में 50 फीसद कुरान पढ़ाई जाती थी लेकिन अब सरकारी मदरसों के पाठ्यक्रम में कुरान शामिल नहीं होगी। विधानसभा में कानून पास कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहते हैं। इसी तरह संस्कृत विद्यालयों (टोल) में अब धार्मिक पाठ्यक्रमों को समाप्त कर दिया गया है। इसके बदले अब भारत का इतिहास और भारत की पुरातन संस्कृति को पढ़ाया जाएगा।
राज्य में इस समय 542 सरकारी मदरसे, 141 हाई मदरसे तथा 97 संस्कृत विद्यालय (टोल) हैं। चालू माह के अंतिम सप्ताह में आहूत विधानसभा के अधिवेशन में राज्य सरकार मदरसों को समाप्त करने के लिए कानून लाएगी। 2022 में राज्य का मदरसा बोर्ड समाप्त होगा। सरकारी मदरसों में भी सामान्य सरकारी विद्यालयों की तरह पढ़ाई होगी। मदरसा और सरकारी विद्यालयों अब कोई अंतर नहीं होगा। इसी तरह संस्कृत टोल समूहों को भास्कर बर्मा विश्वविद्यालय के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। संस्कृत टोल पढ़ने वाले डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त कर सकेंगे। (हि.स.)





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