नई दिल्ली। यूक्रेन के खिलाफ शुरू हुए रूस के हमले के बावजूद अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का संकेत मिलने के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में उत्साह का माहौल बना हुआ है। अमेरिकी बाजार में नैस्डेक और डाऊ दोनों में निचले स्तर से शानदार रिकवरी हुई है। इसी तरह एशियाई बाजारों में भी रिकवरी के बल पर शानदार तेजी बनी हुई है।
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन पर हुए हमले के बाद रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। लेकिन उन्होंने इसके साथ यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका यूक्रेन की मदद के लिए अपनी सेना नहीं भेजेगा। इसी तरह फ्रांस और ब्रिटेन ने भी रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों की बात तो जरूर कही है, लेकिन यूक्रेन के पक्ष में सेना भेजने की बात पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के इस रुख से दुनिया भर के बाजारों ने राहत की सांस ली है, जिसके कारण हर जगह तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में यूक्रेन संकट के बावजूद अमेरिकी बाजार में डाऊ निचले स्तर पर करीब 1000 अंक की रिकवरी करके 92 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसी तरह नैस्डेक 3 प्रतिशत की और एस एंड पी- 500 में 1.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
वहीं, एशियाई बाजारों में भी शानदार बढ़त नजर आ रही है। एसजीएक्स निफ्टी 350 अंक की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है, तो निक्केई में करीब 1.47 प्रतिशत की तेजी नजर आ रही है। निक्केई फिलहाल 26,353.58 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। ताइवान का बाजार भी 0.09 प्रतिशत चढ़कर 17,610.07 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। स्ट्रेट टाइम्स में 1.42 प्रतिशत की बढ़त है। वहीं कोस्पी 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,465.76 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि हैंगसेंग फिलहाल 0.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,786.06 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
भारतीय शेयर बाजार भी दिन के पहले सत्र में अभी तक 2.5 प्रतिशत से अधिक की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है और बाजार का रुख लगातार सकारात्मक बना हुआ है।
दुनिया भर के बाजार में आई इस तेजी के बावजूद शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा समय छोटे निवेशकों के लिए काफी जोखिम भरा है। रूस के यूक्रेन पर हमले के कारण वैश्विक परिदृश्य में लगातार उलटफेर हो सकता है। इसलिए छोटे और खुदरा निवेशकों को बाजार से दूर रहकर वेट एंड वॉच की नीति अपनानी चाहिए, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में उन्हें बड़े नुकसान का सामना न करना पड़े।




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