रमेश मुन्दड़ा
होजाई। असम साहित्य सभा के बैनरतले व कुंही उप समिति के सहयोग से व होजाई जिला साहित्य सभा की देख-रेख में होजाई के श्रीमंत शंकरदेव नगर के सार्वजनिक प्रेक्षागृह में आज केंद्रीय बाल दिवस का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बाल दिवस का उत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर आयोजित खुली सभा का उद्घाटन जिला आयुक्त विद्युत विकास भागवती द्वारा की गई। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस बाल दिवस समारोह के माध्यम से बच्चों को मानसिक रूप से प्रेरित करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बच्चों के चरित्र निर्माण, समाज के प्रति दायित्व, माता-पिता के प्रति भक्ति और भारतीय सनातन संस्कृति को बच्चों के कोमल मन में उत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिकता एक दिन में नहीं बनती, बल्कि समाज, परिवेश और व्यक्तिगत जीवनशैली के माध्यम से धीरे-धीरे गढ़ी जाती है।
उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा एक अच्छा यंत्र बना सकती है, लेकिन एक अच्छा मानव संसाधन बनने के लिए समाज के महान विचारकों के उपदेश सुनना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।
इस उपलक्ष पर असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार गोस्वामी, उपाध्यक्ष श्री पदुम राजखोवा, मुख्य संपादक देवजीत बरा, विशिष्ट वक्ता श्री त्रैलोक्य भट्टाचार्य, केंद्रीय कुंही उप समिति के आह्वायक प्रशांत शैकिया, असम साहित्य सभा नगांव क्षेत्रीय कार्यालय के संपादक रेवत हजारिका, अभिनंदन समिति के अध्यक्ष अनूप बरठाकुर, संपादक अच्युत ठाकुरीया आदि विशिष्टजन उपस्थित रहे व इस अवसर पर अपना बहुमूल्य संबोधन देकर सबों को प्रेरित किया। जिला आयुक्त ने मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों को सम्मानित करते हुए औपचारिक रूप से केंद्रीय बाल दिवस की खुली बैठक का शुभारंभ किया।उद्देश्य और महत्वबाल दिवस का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जन्म जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो बच्चों के प्रति विशेष लगाव रखते थे। इस दिन बच्चों को उनके भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है और उनके चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है। इस आयोजन ने बच्चों के लिए एक उत्साहजनक और प्रेरणादायक वातावरण बनाया और साहित्य-संस्कृति के माध्यम से उन्हें प्रेरित करने का प्रयास किया गया।







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