14 नन्हे पिल्लों को मिला नया जीवन, 25 मासूमों को लगाया गया सुरक्षा का टीका
लखीमपुर से राजेश राठी और ओम प्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
लखीमपुर। जहाँ अक्सर सड़कों पर बेसहारा पड़ी मासूम आँखें अनदेखी रह जाती हैं, वहीं पशुपतिनाथ सेवा फाउंडेशन, उत्तर लखीमपुर ने आज क्रिसमस के अवसर पर करुणा को अपना मार्गदर्शक बनाते हुए समाज के सामने मानवता का एक उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया। संस्था ने अपने गठन के बाद अपने पहले ही सेवा कार्य में यह सिद्ध कर दिया कि सेवा केवल शब्द नहीं, बल्कि संवेदना से जन्मी जिम्मेदारी होती है। हाल के दिनों में असम के विभिन्न क्षेत्रों सहित लखीमपुर में कुत्तों के रहस्यमयी रूप से गायब होने की घटनाओं ने अनेक छोटे-छोटे पिल्लों को अचानक अनाथ बना दिया। जिन आँखों में कभी माँ का साया था, वे आज सड़कों पर डर, भूख और असुरक्षा से जूझ रही थीं। इसी पीड़ा को महसूस करते हुए पशुपतिनाथ सेवा फाउंडेशन ने ‘त्याग क्षेत्र’ में एक भावनात्मक और उद्देश्यपूर्ण ‘पप्पी अडॉप्शन ड्राइव’ का आयोजन किया। इस अभियान के दौरान 14 नन्हे, बेसहारा पिल्लों को संवेदनशील परिवारों ने अपने आँगन में स्थान दिया। जिन हाथों को अब तक ठंडे फुटपाथ की आदत थी, उन्हें अब स्नेह की गर्माहट मिली। यह केवल गोद लेना नहीं था—यह उन मासूम जानों को फिर से जीने का हक देना था। संस्था ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन नन्हे प्राणियों को केवल घर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा भी मिले। अभियान के दौरान 25 पिल्लों का टीकाकरण कराया गया, ताकि वे घातक बीमारियों से सुरक्षित रह सकें। साथ ही गोद लेने वाले प्रत्येक परिवार को डॉग फूड और शैम्पू का निःशुल्क किट प्रदान कर यह संदेश दिया गया कि जिम्मेदारी प्रेम के साथ निभाई जानी चाहिए। इस मार्मिक और प्रेरणादायी पहल ने स्थानीय नागरिकों के हृदय को छू लिया। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर न केवल इस प्रयास की सराहना की, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि जब समाज बेजुबानों के लिए खड़ा होता है, तब ही मानवता जीवित रहती है। पशुपतिनाथ सेवा फाउंडेशन, उत्तर लखीमपुर (असम) एक ऐसा सामाजिक संगठन है, जो मनुष्य और पशु—दोनों के दुख को समान रूप से समझता है और सेवा को अपना धर्म मानता है। संस्था की संस्थापक सदस्य डिम्पी पारीक ने प्रेस विज्ञप्ति में भावुक स्वर में कहा कि यह फाउंडेशन का पहला कदम है, लेकिन संकल्प बहुत बड़ा है। आने वाले समय में संस्था द्वारा बेजुबान जानवरों के संरक्षण, उपचार, पुनर्वास और जन-जागरूकता से जुड़े कई मानवीय प्रकल्प निरंतर संचालित किए जाएंगे, ताकि कोई भी मासूम जान अकेली न रह जाए।







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