श्री कृष्ण प्रणामी परिवार द्वारा आयोजित राम कथा के पांचवे दिन राम वनवास का वर्णन
गुवाहाटी. श्री कृष्ण प्रणामी परिवार गुवाहाटी के सौजन्य से महेश्वरी भवन में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा अमृत महोत्सव के पांचवे दिन व्यास पीठ पर विराजमान राष्ट्रीय संत नवराज प्रपन्न जी महाराज जी ने बालकांड को विश्राम देकर अयोध्या कांड की शुरुआत की। जो रामायण का दूसरा सोपान है। महाराज श्री ने अयोध्या कांड के बारे में बोलते हुए कहा कि बालकांड बाल्य काल की शुद्धता का प्रतीक है। अयोध्या कांड युवा का प्रतीक है। जिसका बाल्यकाल अच्छी तरह से व्यतीत हो गया उसका युवा काल भी अच्छी तरह से व्यतीत हो जायेगा।युवाकाल स्वर्ग जाने के लिए सीढी का काम करती है। युवा शक्ति राष्ट्र की शक्ति होती है। अयोध्या कांड में प्रारंभ से लेकर अंत तक आंसुओं की कथा ही है। यह कांड आंसू से शुरू होकर और आंसू से ही समाप्त होता है। सातों कांड मे यह अध्याय ऐसा है जिसमें युद्ध की चर्चा नहीं है। यह अध्याय त्याग का प्रतीक है।आज की कथा मे राम बनवास का मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया गया।कथा के मुख्य यजमान जगदीश अग्रवाल ने कथा प्रारंभ होने से पहले व्यास पीठ और व्यास गुरु की पूजा की। उल्लेखनीय है कि श्री राम कथा का शुभारंभ 26 जनवरी को हुआ और आगामी 3 जनवरी को इसका समापन किया जाएगा।







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