रंगिया से अरुणा अग्रवाल की रिपोर्ट
रंगिया महिला मंडल के तत्वावधान में स्थानीय पंचायती धर्मशाला प्रांगण में चल रही श्री राम कथा के सातवें दिन मंगलवार के पावन कथा प्रसंग में हरिद्वार से पधारे कथा वाचक राष्ट्रीय संत स्वामी नवराज प्रपन्न जी महाराज ने नवधा भक्ति एवं शबरी चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। इस प्रसंग में स्वामी प्रपन्न जी महाराज ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण वाणी से उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब श्रीराम अपनी पत्नी सीता की खोज में वन-वन भटकते हुए माता शबरी के आश्रम पहुंचे, तब वहां प्रेम, भक्ति और समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत हुआ। भगवान श्री राम ने माता शबरी द्वारा दिए गए बैरों को स्वीकार किया जो राम के प्रति सबरी की भक्ति का प्रतीक थे।मां शबरी के प्रेम से ओत-प्रोत बेरों को प्रभु ने ग्रहण कर यह बताया कि सच्चा प्रेम और श्रद्धा ही प्रभु को प्रिय है। प्रभु श्रीराम जी ने मां शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश देते हुए बताया कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन ये नवधा भक्ति के नौ मार्ग हैं, जिसके द्वारा ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रसंग में कथा व्यास के मुखारविंद से निकली हर एक वाणी भक्तों के दिलों में एक जीवंत झांकी की तरह गहराई से उतर गई। आज की कथा में भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। जिन्होंने बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ श्री रामकथा सुनी। कथा में रंगिया ही नहीं बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से भक्तों का आगमन देखा गया।








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