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भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन भागवत महात्म्य एवं धुंधकारी गोकर्ण की कथा का वर्णन


गुवाहाटी। राणी सती महिला समिति गुवाहाटी के सौजन्य से आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सांगानेरिया धर्मशाला में व्यास पीठ से बोलती हुई संत शिरोमणि बाल योगिनी साध्वी करुणा गिरी ने भागवत के महात्यम के बारे में विस्तार से बताया। साध्वी श्री ने कहा कि भागवत पुराण एक दवा है, औषधि है, आशीर्वाद है, मोक्ष प्राप्त करने की सीढ़ी है एवं मोक्ष प्राप्त करने का सबसे सुगम मार्ग भागवत है। इसमें 18000 श्लोक है। प्रथम स्कंध में 19 अध्याय है। इस कथा को दस हजार वर्ष तक सूत जी ने ऋषियों को सुनाई थी। फिर भी कथा का अंत नहीं आया। सप्ताह यज्ञ में सिर्फ सारांश ही सुनाया जाता है। द्वितीय दिन के प्रसंग में भागवत कथा की विधि एवं छठे अध्याय में गोकर्ण धुंधकारी की कथा का विस्तृत रूप से वर्णन किया। संगीतमय भागवत कथा के बीच भजनों की भक्ति में महिलाएं भाव विभोर होकर नृत्य करने लगी। कथा के अंत में भीष्म पितामह की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। इससे पहले आज के यजमान दामोदर धीरासरिया, दीनदयाल जालान और मनोज अग्रवाल ने सपत्नी व्यास पीठ की पूजा कर व्यास गुरु की अर्चना की। कथा के दूसरे दिन महिलाओं की अत्याधिक उपस्थिति देखी गई।


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