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अमृत कथा श्रवण से कानों की भूख और अधिक बढ़ जाती है: साध्वी करुणागिरी


गुवाहाटी। श्री राणी सती महिला समिति के सौजन्य से फैंसी बाजार स्थित सांगानेरिया धर्मशाला में आयोजित श्री भागवत ज्ञान कथा सप्ताह के तीसरे दिन व्यास पीठ पर विराजमान संत शिरोमणि बाल योगिनी साध्वी करुणा गिरी ने अमृत के बारे में व्याख्या करते हुए बताया कि जब राजा परीक्षित भागवत सप्ताह का आयोजन कर रहे थे तब देवताओं ने अमृत कलश लेकर राजा परीक्षित से प्रार्थना की कि आप हमसे अमृत ले लीजिए और भागवत कथा अमृत हमें दे दीजिए। तब राजा परीक्षित ने कहा कि अमृत से तृप्ति होती है, संतुष्टि होती है फिर भी आप यह मेरे को क्यों दे रहे हो। इसका कारण क्या है।साध्वी करुणा गिरी ने आगे बताया कि अमृत तीन तरह के होते हैं। पहले अमृत जो देवताओं के पास था और समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था। दूसरा अमृत चंद्रमा के पास है जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता बढ़ता रहता है ,और शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को चंद्रमा की कलाओं से जो अमृत बरसता है वह पृथ्वी लोक की संपूर्ण वनस्पतियों को प्रभावित कर पुष्ट बनता है। यह वनस्पति मनुष्य खाकर क्षणिक तृप्ति प्राप्त करते हैं। तीसरा अमृत कथा अमृत होता है जो तीनों अमृत में से सर्वोपरि और सर्वश्रेष्ट होता है। यह कथा अमृत जगत में सभी पदार्थों की तरह खाया या पिया नहीं जाता। बल्कि कानों से श्रवण किया जाता है। कानों से श्रवण करने से कथा अमृत की भूख कानों में और अधिक बढ़ जाती है। जिसने लीन होकर इस अमृत को पिया वह उतना ही अपनी भक्ति को सुदृद्ध किया। तीसरे दिन की कथा में साध्वी करुणा गिरी ने महाभारत प्रसंग की बर्णना करते हुए कहा कि भिष्म पितामह की इच्छा मृत्यु के पश्चात जब पांडव वापस अपने स्थान पर लोटे तब उन्होंने कृष्ण के साथ कई तरह की समीक्षा चर्चाएं की। इन चर्चाओं में द्रोपदी चीर हरण से संबंधित चर्चा में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी से कहा जुए के समय दुर्योधन ने कहा था कि मेरी ओर से मामा शकुनि पाशा फेंकेंगे। उस समय पांचो पांडव मौन धारण किए हुए बैठे थे। जबकि वह बोल सकते थे कि हमारी ओर से भी कृष्णा पाशा फेंकेंगे। अगर यह बोलते तो शायद स्थिति कुछ और होती। इसी तरह जब अभिमन्यु के वध के पश्चात अश्वत्थामा अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक की हत्या करने के लिए बढा तो उत्तरा ने कृष्ण से प्रार्थना की कि आप मुझे मत बचाइए। मेरे गर्भ को मत बचाइए मगर अपने भक्तों के कुल को बचाइए। और तब भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र को नष्ट किया और अपनी गदा से उतरा के गर्भ की रक्षा की। आज के प्रसंग में ध्रुव चरित्र, राजा पृथु की कथा, राजा बलि व वामन कथा का वर्णन किया। चतुर्थ दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।इस से पहले तीसरे दिन के यजमान कैलाश जालान और का अशोक जालान ने व्यास पीठ पर भागवत ग्रंथ की पूजा कर साध्वी श्री करुणा गिरी की वंदना की।

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