योगी आदित्यनाथ ने दिया शीर्षक हटाने का आदेश
गुवाहाटी: परशुराम फाउंडेशन ने वेब सीरीज फिल्म के लिए प्रयुक्त शीर्षक घूसखोर पंडित को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) तथा भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को औपचारिक शिकायत ई-मेल भेजी है। फाउंडेशन का कहना है कि पंडित शब्द किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। इसके साथ घूसखोर जैसे आपराधिक एवं निंदनीय शब्द का प्रयोग कर पूरे समाज को कलंकित करने का प्रयास किया गया है, जो सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा है। प्रेस नोट में कहा गया है कि यह शीर्षक न केवल सीबीएफसी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, बल्कि संविधान में निहित समानता, गरिमा और सम्मान के अधिकार के भी प्रतिकूल है। इस प्रकार की सामग्री से समाज में पूर्वाग्रह, घृणा और विभाजन को बढ़ावा मिलता है। परशुराम फाउंडेशन ने मांग की है कि संबंधित वेब सीरीज / फिल्म के प्रमाणन पर तत्काल रोक लगायी जाए। घूसखोर पंडित शीर्षक को बदलने या रद्द करने का निर्देश दिया जाए, भविष्य में किसी भी समुदाय विशेष को अपमानित करने वाले कंटेंट पर सख्त निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध रचनात्मक स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, बल्कि किसी पूरे समाज को अपराध से जोड़कर अपमानित करने की प्रवृत्ति के विरुद्ध है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाये गये तो फाउंडेशन अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय करेगा। योगी के आदेश पर एफआईआर होने के बाद नेटफ्लिक्स ने ‘ घूसखोर पंडित का टीजर हटाया गया।
नेटफ्लिक्स फिल्म के टाइटल ने कई ग्रुप्स में गुस्सा पैदा कर दिया है, और कई संतों ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर उनसे इस मामले को देखने की गुजारिश की है।








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