चित्रांकन, दिहानाम प्रतियोगिता, अंकिया भाउना और शंकरी सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
रोहा। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की 578वीं आविर्भाव महोत्सव का तीन दिवसीय आयोजन बुधवार को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। रोहा स्थित सार्वजनिक श्रीमंत शंकरदेव नामघर परिसर में आयोजित इस महोत्सव के दौरान हरिनाम संकीर्तन और श्रीमंत शंकरदेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
श्रीमंत शंकरदेव नामघर संचालन समिति के तत्वावधान और 78वें उत्सव उद्यापन समिति के सहयोग से आयोजित महोत्सव का शुभारंभ 19 अक्टूबर को श्रीमद्भागवत की शुभयात्रा के साथ हुआ। पहले दिन प्रातः प्रसंग, नामघोषा पाठ और नामघर संचालन समिति के अध्यक्ष हिरेन बोरा द्वारा धर्मध्वजा फहराने के बाद ‘एक वृक्ष, दस पुत्र समान’ शीर्षक से पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 100 श्रद्धालुओं ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने सिर पर श्रीमद्भागवत धारण कर भव्य शुभयात्रा निकाली। बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। हरिनाम संकीर्तन, भक्ति गीतों और श्रीमंत शंकरदेव के जयकारों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो गया।
दोपहर बाद ‘विश्व में एआई, इंस्टाग्राम और फेसबुक के समय नवप्रजन्म की दृष्टि में जगतगुरु श्रीमंत शंकरदेव’ विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। शाम को समाजसेवी स्वर्गीय मृदुल मेधी की स्मृति में अविभाजित नौगांव जिला स्तरीय दिहानाम प्रतियोगिता हुई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने प्रस्तुतियां दीं।
महोत्सव के दूसरे दिन, 20 अक्टूबर को चित्रांकन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके बाद स्वर्गीय डिम्बेश्वर दास स्मृति मंच पर अविभाजित नौगांव जिला स्तरीय श्रीमंत शंकरदेव रचित अंकिया भाउना प्रतियोगिता हुई। विभिन्न दलों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से महापुरुष की वैष्णव संस्कृति, आध्यात्मिक विचारधारा और सामाजिक संदेश को जीवंत किया। विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
रात में युवा पत्रकार और श्रीमंत शंकरदेव के जीवन-दर्शन की अध्येता एंजिला सांग्माई ने महापुरुष के जीवन, आदर्शों और समाज सुधार संबंधी विचारों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मत्स्य विभाग के संचालक गौरीशंकर दास सहित बड़ी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।
महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन, 21 अक्टूबर को प्रातः प्रसंग के बाद नई पीढ़ी के युवाओं ने श्रीमंत शंकरदेव रचित दशम स्कंध का पाठ किया। इसके बाद दोपहर में मयनाराम डेका स्मृति मंच पर पारंपरिक दिन भाउना का मंचन हुआ, जिसे दर्शकों ने सराहा।
समापन अवसर पर रात में ग्रंथ विमोचन, पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद स्वर्गीय कालिकांत हजारिका सांस्कृतिक मंच पर शंकरी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने शंकरी संस्कृति पर आधारित गीतों, नृत्यों और अन्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
तीन दिवसीय महोत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ श्रीमंत शंकरदेव की समृद्ध सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।





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