भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही निजी भागीदारी के पीछे क्या है?
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में निजी कंपनियों और स्टार्टअप के लिए भी खुला है। भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।
सरकार के अनुसार 2026 तक भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में 400 से अधिक स्टार्टअप हो चुके हैं। निजी कंपनियां उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, अंतरिक्ष आधारित सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
इसी बदलाव का एक उदाहरण निजी क्षेत्र द्वारा विकसित प्रक्षेपण यान हैं। सरकार ने बताया है कि स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 भारत का पहला निजी तौर पर विकसित कक्षीय प्रक्षेपण यान है।
इस बदलाव का महत्व केवल अंतरिक्ष अभियानों तक सीमित नहीं है। निजी भागीदारी से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, निर्माण, निवेश और नए कारोबारी अवसरों के लिए भी एक नया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है।
सरकारी जानकारी के अनुसार भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वर्तमान में लगभग 8.4 अरब डॉलर का है और इसे 2030 तक 40 से 45 अरब डॉलर तथा 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।





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