फैटी लिवर का नाम सुनते ही बहुत से लोग इसे शराब से जोड़ देते हैं। लेकिन लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने के कई कारण हो सकते हैं।
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज, जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज यानी MASLD भी कहा जाता है, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज जैसी स्थितियों से जुड़ी हो सकती है।
इसकी खास बात यह है कि कई लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए केवल शरीर में कोई दर्द नहीं होने का मतलब यह नहीं कि लिवर पूरी तरह स्वस्थ है।
संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन पर ध्यान देना लिवर सहित पूरे शरीर के लिए महत्वपूर्ण है।
फैटी लिवर का पता केवल लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट और इमेजिंग जैसी जांच करा सकते हैं।





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