लेजाई-बोरदैबाम में ग्रामीणों ने रखीं 11 प्रमुख समस्याएं, बिजली के खंभों और तटबंध की बदहाल स्थिति सामने आई
डिब्रूगढ़ से ज्योति खाखोलिया की रिपोर्ट
डिब्रूगढ़। आम जनता की समस्याओं और शिकायतों को करीब से समझने के उद्देश्य से डिब्रूगढ़ प्रेस क्लब की ओर से चलाए जा रहे ‘गाओलोई जाओं’ यानी ‘गांव की ओर चलो’ कार्यक्रम के तहत 3 अक्टूबर को लेजाई-बोरदैबाम गांव का दौरा किया गया। डिब्रूगढ़ शहर से करीब 30-35 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रेस क्लब के करीब 50 पत्रकार शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत बोरदैबाम सांस्कृतिक प्रेक्षागृह में हुई, जहां सौ से अधिक स्थानीय निवासी पत्रकारों से रूबरू हुए और क्षेत्र की समस्याओं एवं शिकायतों को सामने रखा। बैठक की अध्यक्षता डिब्रूगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष मानस ज्योति दत्ता ने की, जबकि महासचिव रिपुंजय दास ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। स्थानीय नेताओं ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों का पारंपरिक गमोसा एवं चेलेंग चादर से स्वागत किया।
सामुदायिक नेताओं हितेश गोगोई, रूपनाथ मिरी और संजीव चांगमई ने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं पर प्रकाश डाला। इस दौरान लेजाई-बोरदैबाम क्षेत्र से जुड़ी 11 प्रमुख समस्याओं और शिकायतों वाला एक ज्ञापन प्रेस क्लब के सचिव को सौंपा गया। हितेश गोगोई ने ज्ञापन की प्रमुख बातों को सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया।
बैठक के बाद पत्रकारों ने स्थानीय लोगों के साथ क्षेत्र के विभिन्न समस्याग्रस्त स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बिजली व्यवस्था की स्थिति सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, बिजली विभाग की ओर से घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर घरों तक बिजली पहुंचाने वाले तार आधिकारिक बिजली के खंभों के बजाय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए बांस के खंभों से होकर गुजर रहे हैं। पत्रकारों ने कई स्थानों पर बांस के खंभों पर रस्सियों से बंधे और नीचे तक लटकते बिजली के तार देखे। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन तारों के नीचे से उन्हें प्रतिदिन आवागमन करना पड़ता है।
क्षेत्र में एकमात्र पशु चिकित्सा अस्पताल की स्थिति भी सामने आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल में डॉक्टर और अन्य आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं तथा भवन भी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।
स्थानीय निवासियों ने लेजाई-बोरदैबाम से इटाखुली थांग गांव तक सेस्सा नदी पर बनाए गए तटबंध की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस तटबंध की स्थिति बेहद खराब है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि तटबंध का काम पूरा किए बिना ही राशि का भुगतान किए जाने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सेस्सा नदी के कटाव नियंत्रण के लिए निर्धारित पांच स्थानों में से सेशाकिना बोरदैबाम स्थल पर भू-बोरी (जियो-बैग) नहीं लगाए जाने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की। वहीं, बोरदैबाम जलापूर्ति योजना को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो सकी और पाइपलाइन भी जल्द ही क्षतिग्रस्त हो गई।
स्थल निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर नाराजगी और निराशा व्यक्त की। ग्रामीणों ने सरकार से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने और संबंधित विभागों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की।






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