मेघालय में 125 साल का तापमान रिकॉर्ड टूटा, मानसूनी बारिश में भी 43 प्रतिशत की कमी
शिलांग: मेघालय में वर्ष 2025 पिछले 125 वर्षों का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया। इस दौरान राज्य का वार्षिक औसत तापमान बढ़कर 20.77 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पुणे स्थित जलवायु अनुसंधान एवं सेवा कार्यालय ने मेघालय सरकार के सहयोग से 'स्टेटमेंट ऑन क्लाइमेट फॉर मेघालय : 2025' रिपोर्ट तैयार की है। इसके अनुसार, वर्ष 2025 का औसत तापमान 1991 से 2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.96 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इस दौरान राज्य का न्यूनतम तापमान अब तक के रिकॉर्ड में सबसे अधिक, जबकि अधिकतम तापमान तीसरे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1901 से 2025 के बीच मेघालय के वार्षिक औसत तापमान में प्रति शताब्दी 0.73 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में अधिकतम तापमान 0.85 डिग्री और न्यूनतम तापमान 0.62 डिग्री सेल्सियस प्रति शताब्दी की दर से बढ़ा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान तापमान में वृद्धि अधिक स्पष्ट रही। इस मौसम में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जो 1901 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि के बीच राज्य में वर्ष 2025 के दौरान बारिश भी सामान्य से काफी कम रही। पूरे साल में मेघालय को दीर्घकालिक औसत बारिश का केवल 73 प्रतिशत पानी मिला। वहीं, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य बारिश का केवल 57 प्रतिशत दर्ज किया गया, यानी 43 प्रतिशत की कमी रही।
राज्य की कुल वार्षिक बारिश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का योगदान लगभग 71.8 प्रतिशत होता है। वहीं, मानसून से पहले के मौसम में सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण वार्षिक बारिश की कुल कमी कुछ हद तक कम हुई। हालांकि, जून से अक्टूबर के बीच बारिश ज्यादातर सामान्य से नीचे रही और जुलाई में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई। सर्दियों, मानसून और मानसून के बाद के मौसम में भी बारिश सामान्य से कम रही।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार, अध्ययन में शामिल 11 जिलों में से छह में सामान्य से कम, तीन में सामान्य, एक में सामान्य से काफी अधिक और एक जिले में अत्यधिक कमी वाली बारिश दर्ज की गई। दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिम जयंतिया हिल्स में अत्यधिक कमी दर्ज की गई।
बारिश की स्थिति का आकलन करने वाले मानकीकृत वर्षा सूचकांक के अनुसार, केवल पूर्वी गारो हिल्स में हल्की नम स्थिति दर्ज की गई। शेष जिलों में अलग-अलग स्तर पर सूखे जैसी स्थिति देखने को मिली।
रिपोर्ट में वर्ष 1951 से 2024 के बीच के बारिश के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया। इसके अनुसार, पश्चिमी मेघालय के तीन आपस में जुड़े जिलों में बारिश बढ़ने का रुझान देखा गया, जबकि बाकी जिलों में इसमें गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस आकलन के लिए पांच जिलों के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।
राज्य में कुल बारिश कम रहने के बावजूद वर्ष 2025 में कई स्थानों पर भारी वर्षा की घटनाएं दर्ज की गईं। चेरापूंजी, मौसिनराम और शिलांग सहित कई मौसम केंद्रों पर भारी, बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश हुई। कुछ स्थानों पर 24 घंटे के भीतर 204.5 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो अत्यंत भारी वर्षा की श्रेणी में आती है। रिपोर्ट में वर्ष के दौरान बाढ़, बिजली गिरने, आंधी-तूफान, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह अध्ययन कृषि, जल प्रबंधन, बिजली, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की योजना तैयार करने में वैज्ञानिक आधार प्रदान कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में तापमान वृद्धि और बारिश की कमी का फसल उत्पादन, जल उपलब्धता या आम लोगों की आजीविका पर सीधा प्रभाव नहीं आंका गया है। इसके लिए अलग से अध्ययन की आवश्यकता होगी।
.jpg)


.png)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें