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मौन हुए 'कड़वे बचन'


संपत मिश्र

गुवाहाटी - दिगंबर जैन धर्म संघ के क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुण सागर जी की समाधि संलेखना आज प्रातः 03:18 बजे पूर्ण हुई। 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। वहां उन्होंने इलाज कराने से इंकार कर दिया और कृष्णा नगर दिल्ली स्थित राधा पुरी जैन मंदिर चतुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय लिया था। मुनि श्री अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज जी की स्वीकृति के बाद संलेखना स्वीकार लिया। संलेखना आहार जल न लेने का संकल्प है। समाधि संलेखना के अंतिम क्षणों में उनके साथ मुनि श्री अरुणसागर जी, आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी, उपाचार्य गुप्ती सागर जी, मुनि श्री शिखानंद सागर जी उपस्थित थे। मुनि श्री का अंतिम संस्कार आज 3:00 बजे दिल्ली मेरठ हाईवे से प्रारंभ होकर 28 किलोमीटर दूर तरुण सागरम में होगा। समाचार मिलते ही संपूर्ण जैन समाज के साथ पूरा राष्ट्र स्तब्ध हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर जी के निधन पर शोक प्रकट किया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान सहित संपूर्ण राष्ट्र के अन्य व्यक्तियों ने शोक प्रकट किया और अपूरणीय क्षति बताया।

तरुण सागर जी महाराज का मूल नाम पवन कुमार जैन था। उनका जन्म दमोह (मध्यप्रदेश) के गांव गुहजी में 26 जून, 1967 को हुआ था। मुनिश्री ने 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली थी।

1967 में मध्य प्रदेश के दमोह में जन्मे सागर जी अपने कड़वे प्रवचन के लिए मशहूर थे। इसी वजह से उन्हें क्रांतिकारी संत भी कहा जाता है। कड़वे प्रवचन नाम की पुस्तक से वे काफी प्रसिद्ध हुए। विभिन्न वर्गों को एकजुट करने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि जैन धर्म के मुताबिक मृत्यु को समीप देखकर खानपान त्याग देने को संथारा या संलेखना कहा जाता है। जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है। राजस्थान हाई कोर्ट ने 2015 में इसे आत्महत्या जैसा बताते हुए उसे भारतीय दंड संहिता 306 और 302 के तहत दंडनीय बताया। दिगंबर जैन परिषद ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। आज उनकी अंतिम यात्रा में भाग लेने के लिए उनके अनुयायियों का कृष्ण नगर स्थित राधा पुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर आने का तांता लग गया हैं।

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