नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) विवाद पर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को हटाने से पहले उस कमेटी से सलाह करना उचित नहीं समझा जिसके सुझाव से नियुक्ति की जाती है। उन्होंने कहा कि सीबीआई में विवाद था तो उसको कमेटी के सामने लाते। इस तरह से निदेशक को हटाने का अधिकार नहीं है। खड़गे ने गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर यह पूछा है कि आखिर सरकार ने सीबीआई निदेशक के मामले को कमेटी के सामने क्यों नहीं रखा। प्रधानमंत्री स्वयं उस कमेटी के अध्यक्ष हैं और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता उसके सदस्य। उन्होंने कहा कि यह कमेटी ही सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति करती है, लेकिन सरकार ने जांच एजेंसी के मुखिया को हटाते हुए कमेटी से पूछना उचित नहीं समझा।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) पर भी दबाव है। सरकार ने इस मामले में अपनी मनमर्जी की है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बात नागवार लगी कि सीबीआई प्रमुख राफेल घोटाले की शिकायत करने आए लोगों से क्यों मिले। आलोक वर्मा ने अरुण शौरी, प्रशांत भूषण का ज्ञापन सरकार से बिना पूछे क्यों लिया। खड़गे ने कहा कि अब वर्मा को इसी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। खड़गे ने कहा कि वरिष्ठ अफसर आरके दत्ता, जिनके पास सीबीआई में 208 माह तक काम करने का अनुभव है। वे जांच एजेंसी में विशेष निदेशक रहे हैं। उन्हें निदेशक क्यों नहीं बनाया गया? उनसे जूनियर अफसर को अंतरिम निदेशक बना दिया गया।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार ने अब अपनी जांच एजेंसी की जासूसी करनी शुरू कर दी है। सुबह खुफिया ब्यूरो (आईबी) के चार आदमी प्रधानमंत्री के निर्देश पर वर्मा के घर के बाहर जासूसी करते पकड़े गए हैं। रात में सरकार को जो सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव मिले हैं वह भी संदिग्ध हैं। उनके ऊपर वरिष्ठ अफसर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अंतरिम निदेशक नहीं बनाया। सिंघवी ने कहा कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक का कार्यभार संभालने वाले नागेश्वर राव पर भी अपनी सेवा में कथित तौर से कई तरह की अनियमितताएं बरतने के आरोप लगे हैं।








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