गुवाहाटी, 9 नवम्बर । तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाधिशास्ता आचार्य श्री तुलसी का 105वां जन्मदिन अणुवत दिवस के रूप में मनाया गया। अणुव्रत समिति, गुवाहाटी के तत्वावधान में शुक्रवार को प्रात : 9.30 बज से रथानीय तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित उक्त कार्यक्रम की शुरुआत अणुव्रत गीत के संगान से हुई । तत्पश्चात अणुवत आचार संहिता का वाचन उपाध्यक्ष श्री बजरंग डोसी ने किया । स्वागत भाषण देते हुए अध्यक्ष श्री छत्तरसिंह चोरड़िया ने कहा कि आचार्य तुलसी दूरद्गष्टा और अनुभवसिद्ध महापुरुष थे । इसी कम में श्री जैन श्येताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री वसंत कुमार सुराणा ने कहा कि उनके गुणों का वर्णन करना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है । आचार्य श्री तुलसी ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा को समर्पित कर दिया । श्री दिलीप दुगड़ ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने मानव जति के उत्थान के लिए अनेकानेक आयाम प्रस्तुत किए । जैन धर्म के विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार के लिए आपने समण श्रेणी की स्थापना की । आपके पावन चरणों के द्वारा भारत के लगभग सभी प्रांत पवित्र हुए । अनैतिकता, रूढिवाद के विरुद्ध आपने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया । भारत के उस समय के लगभग सभी राजनेता आप के श्री चरणों में राष्ट्रहित में विचार-विमर्श के लिए उपस्थित होते थे । अणुव्रत महासमिति के संगठन मंत्री श्री निर्मल सामसुखा व कार्यकारिणी सदस्य श्री अशोक भालू, श्रीमती सुनीता गुजरानी, तेरापंथी सभा के मंत्री श्री अशोक सेठिया, आचार्य तुलसी महाश्रमण रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री उत्तमचंद नाहटा, तेरापंथ महिला मंडल की उपाध्यक्ष श्रीमती रंजू खटेड़, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष श्री नीरज बाफणा, गुवाहाटी ज्ञानशाला की श्रीमती संध्या कोठारी के अलावा श्री छत्तरसिंह बुच्चा एवं श्री संजय बोथरा आदि ने वक्तव्य, गीतिका, मुक्तक आदि के माध्यम से अपने आराध्य को भावांजलि दी । कार्यक्रम के अंत में इस अवसर पर गुरुदेव तुलसी के जीवन पर आधारित प्रश्नमंच का सफल आयोजन श्री दिलीप दुगड़ द्वारा संचालित जिया गया । धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष श्री संजय चोरड़िया ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन उपाध्यक्ष श्री बजरंग बैद ने किया । इस आशय की जानकारी मंत्री नवरतनमल गधैया ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी ।







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