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सामयिक: गोलाघाट इंजीनियरिंग कॉलेज का दोषी कौन?



प्रवेश मिश्र
कार्यकारी संपादक, राइज प्लस

गोलाघाट इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन हुए महज कुछ महीने ही हुए थे की संकटों के बादल इस कॉलेज के चारों ओर फिलहाल मंडरा रहे हैं। औपचारिक तौर पर फरवरी 2019 को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस कॉलेज का उद्घाटन किया था। भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों को मान्यता देने वाली संस्था एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) ने गोलाघाट इंजीनियरिंग कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी है। अभी अभी तो यह कॉलेज खुल ही थी। सरकार से कहां चूक हो गई? फिलहाल इस कॉलेज में 92 विद्यार्थी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। अब उनका क्या होगा? राज्य के छठे सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज गोलाघाट इंजीनियरिंग कॉलेज में 2018 कि अगस्त में पहले बैच के लिए एडमिशन हुए थे। गत 30 अप्रैल को जारी एक पत्र में एआईसीटीई ने असम सरकार को एक लंबी फेहरिस्त थमाते हुए यह कह दिया कि इस कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकती। इस पत्र में 17 अलग-अलग बिंदुओं पर एआईसीटीई ने असंतोष जाहिर किया। असम सरकार द्वारा कई दस्तावेज एआईसीटीई को जमा नहीं कराए गए थे। जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइब्रेरी, एमेनिटी एरिया, कैफेटेरिया, स्पोर्ट्स, इत्यादि संबंधित ब्यौरा नहीं देने की बात कही गई है। इस पत्र में यह भी बात कही गई है की सिविल मैकेनिकल और केमिकल इंजीनियरिंग में 2018-19 सत्र के लिए छात्रों के एडमिशन बिना मान्यता के हुए। और भी कई बातें इस पत्र में लिखी गई है जिससे एआईसीटीई के मापदंडों का ख्याल नहीं रखा गया। आखिरकार सरकारी अमला व्यस्त कहां था? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सम्बंधित मंत्री एवं विभाग के लोगों ने जरूरती कागज़ात व जानकारियों से एआईसीटीई को अवगत नहीं करवाया। शायद चुनाव प्रचार ज्यादा जरुरी था इस मुद्दे पर ध्यान देने के वजाय।

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