रविन्द्र तोदी
धुबड़ी। १४ साल के वनवास के बाद अंततः राम मिल ही गया तथा धुबड़ी प्रशासन ने भी वनवास का सुखद समापन करते हुए भरत मिलाप करवाने की सारी प्रक्रिया पूरी कर आज राम को ससम्मान अपने संसार में भेज दिया। दरअसल यह अजब व अनोखा मामला धुबड़ी में सामने आया है।विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक मूलतः बिहार के आरा (भोजपूर) जिले के कोईलावर थाने के तहत श्रीपालपूर गांव का निवासी मनोज कुमार राम बिते १४ सालों से लापता था। तथा इसके भाईयों ने भी लापता भाई राम के मिलने की सारी उम्मिदें तक छोड़ दी थी। परंतु शायद १४ वर्षो का काल ही अपने आप में भगवान का आशीर्वाद स्वरूप है। तभी तो मानसिक संतुलन खोकर दर दर भटकने वाला मनोज कुमार राम भी अंततः मिला भी तो १४ वर्षो बाद। दरअसल राम के मिलने की कहानी भी काफी दिलचस्प है।लोकडाउन के दौरान जिला सत्र न्यायाधीश अदालत कार्यालय के सामने लंबे व बेतरतीब बाल व साधुओं जैसी लंबी-लंबी दाढ़ी वाले एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति पर अदालत के ही एक कर्मचारी महेश भगत की नजर पड़ी। तथा कई दिनों की मशक्कत भरी पूछताछ के बाद राम ने अपने गांव का पता बता दिया। परंतु चुंकी उसकी जानकारी पर भरोसा करना मुश्किल था इसलिए भगत ने गुगल के जरिए पहले उसके गांव व उसके परिजनों का फोन नंबर हासिल किया। तथा बाद में व्हाट्सएप विडियो कोल के जरिए जैसे ही राम के भाईयों ने अपने भाई को देखा तथा सुनिश्चित किया गया तो मानों भावनाओं की लहर दौड़ पड़ी। बिहार में मौजूद बड़े भाई जितेंद्र राम से फोन पर जब इस संवाददाता ने बात की तो पूरी तरह से आवेगिक जितेंद्र ने बताया कि दरअसल मनोज एक अच्छा मेकानिक है। हम हैदराबाद में एक दवा कारखाने में एक साथ नौकरी करते थे। परंतु १४ वर्ष पूर्व वह हैदराबाद से ही लापता हो गया था।समय के साथ हमने उसके मिलने की सारी उम्मिदे छोड़ दी थी।आज भाई राम को देखकर पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। मालूम हो कि मामला संज्ञान में आते ही प्रशासन ने बिते ३ मई को मनोज कुमार राम को नेबार्ड हाल्फवे होम में एक तरह से क्वारैंटाईन में रखा था। तथा जिला उपायुक्त अनंत लाल ज्ञानी के दिशा-निर्देश पर आज एक सहयोगी के साथ राम को उसके गांव भेज दिया गया।मोके पर प्रशासनिक अधिकारी राहुल जविर,समाज कल्याण विभाग की किशोरी बरुआ व अन्य कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।








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