अरुणा अग्रवाल
रंगिया। दीहिंग पाटकाई रेनफॉरेस्ट और डिब्रु चिखोवा राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण की मांग को लेकर एलोरा विज्ञान मंच की रंगिया शाखा ने आज रंगिया राइजमेल कृषक शहीद भवन के पास विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें दीहिंग पटकाई रेनफॉरेस्ट और डिब्रु चिखोवा राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा की मांग की गई। मंच के रंगिया शाखा के अध्यक्ष मीराजुल इस्लाम और मुख्य सचिव प्रणव चन्द्र डेका के नेतृत्व मे आयोजित इस कार्यक्रम मे मंच के सदस्यों ने विभिन्न प्रतिबादी स्लोगान लिखित बेनर और प्ले कार्ड हाथों मे लेकर शहिद भवन के सामने मौन प्रतिवाद किया। इस कार्यक्रम के जरिये मंच द्वारा दीहिंग-पाटकाई रेन फॉरेस्ट, अभ्यारण्य और संरक्षित वनांचल मे कोयला मुक्त खनन की अनुमती को हटाना, इसकी जैव विशिष्ठता तथा परिस्रपारिकता की रक्षा करना,अभयारण्यों और संरक्षित वनों में कोयला-मुक्त खनन परमिटों की वापसी, दीहिंग-पटकाई संरक्षित वनों की जैव विचित्रता तथा पारिस्रपारिकता का संरक्षण करना, प्राकृतिक संपदा की लूट, प्राणियों, उध्भिदो और पर्यावरण का विनाश बंद करना, प्रकृति के साथ संघात न कर उन्नयन के पथ पर चलना, डिब्रु चिखोवा राष्ट्रीय उद्यान में हाइड्रो-कार्बन की खोज के लिए खनन परमिट की वापसी, पर्यावरण के विनाश नीति की वापसी, प्रदूषण में वृद्धि और असम के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए सार्वजनिक हित पर अतिक्रमण की मांग की गयी। इस मौके पर एलोरा साइंस फोरम की रंगिया शाखा के अध्यक्ष मिराजुल इस्लाम ने कहा कि दिहिंग पाटकाई वर्षावन और डिब्रू चिखोवा नेशनल पार्क का केवल असम और भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के जैव सम्पदा के मानचित्र में एक बहुमूल्य स्थान है। इस संदर्भ में, इस वर्षा आधारित क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति देने का सरकार का निर्णय हठकारी है। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल संपदा को प्राप्त करके से नहीं होगा बल्कि जैव विविधता और प्रकृति की रक्षा होने पर ही मानव सभ्यता बच पाएगी।









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