नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भड़काऊ भाषण देने के मामले में जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई टाल दी है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर को 30 जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि संबंधित राज्य सरकारों ने इस मामले पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। तब संबंधित राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की। तब दवे ने कहा कि हमें असम सरकार और दिल्ली सरकार से कोई परेशानी नहीं है। हमें डर है कि यूपी सरकार शरजील इमाम को प्रोडक्शन वारंट पर ले जा सकती है। तब जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि आपकी याचिका एफआईआर को एक जगह करने को लेकर है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी होगा वो कानून के मुताबिक होगा। उसके बाद कोर्ट इस मामले को चार हफ्ते के लिए टालना चाहती थी लेकिन दुष्यंत दवे ने इस जल्द सुनवाई करने की मांग की। उसके बाद कोर्ट ने 30, जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पिछले 26 मई को उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर को नोटिस जारी की थी। कोर्ट ने पहले सिर्फ दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। पिछले 1 मई को कोर्ट केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से कहा गया था कि जामिया और अलीगढ़ में दो भाषण दिए। उन्हें खुद अपलोड नहीं किया।
दिल्ली पुलिस ने पिछले 18 अप्रैल को शरजील इमाम के ख़िलाफ़ दिल्ली में दंगे भड़काने के मामले में साकेत कोर्ट में पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। शरजील इमाम के खिलाफ देशद्रोह की धारा के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। चार्जशीट में कहा गया है कि 13 दिसंबर 2019 को शरजील इमाम ने शाहीन बाग में देश को तोड़ने की बात कही थी। पुलिस ने शरजील इमाम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत आरोप लगाया है।
दिल्ली पुलिस ने 18 फरवरी को चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें शरजील इमाम पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया है। शरजील इमाम को शाहीन बाग में आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में बिहार से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक जामिया हिंसा की जांच के दौरान एक आरोपी ने कहा कि उसने शरजील इमाम के भाषण से प्रभावित होकर हिंसा को अंजाम दिया। (हि.स.)








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