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लद्दाख से अरुणाचल तक 20 संवेदनशील स्थान चिन्हित



नई दिल्ली। भारतीय सेना ने लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के साथ 20 से अधिक संवेदनशील स्थानों की पहचान की है, जहां से सर्दियों में बर्फ पिघलने के बाद चीनी सेना भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसपैठ के प्रयास कर सकती है। चीन की असामान्य हलचल दिखने के बाद अरुणाचल के सीमावर्ती इलाकों में और चौकसी बढ़ा दी गई है। 

लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ इस समय चीन के साथ चल रहे तनाव के चलते अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। इसके बावजूद चीनी सेना भारतीय सीमा के दुर्गम इलाकों में चोरी-छिपे घुसपैठ करने की फिराक में रहती है। चीन ने पूर्वी लद्दाख में भारत से गतिरोध के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास तीन नए गांव बसा दिए हैं। इसके अलावा सीमा से 5 किमी. दूर तवांग में नया सैन्य बुनियादी ढांचा भी खड़ा कर लिया है। 

सेटेलाइट तस्वीरों के अनुसार यह स्थान बुमला दर्रे से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर भारत, चीन और भूटान के ट्राइजंक्शन से नजदीक है। इतना ही नहीं, इन गांवों में चीन ने लोगों को भी बसा दिया है। पूर्वी लद्दाख में चीन की घुसपैठ लगातार नाकाम किये जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक भारत-चीन सीमा पर 20 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है, जहां असामान्य हलचल देखी गई है। चीनी सेना पहाड़ियों पर जमी बर्फ पिघलने के बाद इन जगहों से घुसपैठ का दुस्साहस शुरू कर सकती है। इससे पहले भी कई बार लद्दाख सीमा के अलावा अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीन की हलचल देखी गई है, इसलिए भारत पहले से ज्यादा सतर्क है। 

भारत ने 34 साल बाद अरुणाचल प्रदेश में सुमदोरोंग चू फ्लैशप्वॉइंट के पास 202 एकड़ उस रणनीतिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया है, जिस पर बरसों से चीन की नजर थी। इसी जमीन को लेकर चीन के साथ 1986 में भारत के साथ विवाद हुआ था और दोनों देशों की सेनाएं आठ महीने तक आमने-सामने रही थीं। दोनों देशों के बीच 1987 में इस जमीन को लेकर इतना गतिरोध बढ़ा कि भारतीय और चीनी सेना 8 महीने तक आमने-सामने रहीं थीं। इसके बाद से 202 एकड़ जमीन का यह टुकड़ा दोनों देशों के बीच विवादित बना रहा और चीन की नजर हमेशा इस जमीन पर बनी रही। चीन की नजरें अभी भी इस जमीन पर जमीं हैं और वह यहां फिर घुसपैठ करने की जुगत में है। 

इन दिनों चीनी वायुसेना की हलचल अपने एयरबेस पर बढ़ती दिख रही है, इसीलिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी चीन के 7 सैन्य एयरबेसों पर निगरानी बढ़ा दी है। सेटेलाइट या अन्य माध्यमों से वहां की हर छोटी-बड़ी हलचल पर भारत की पैनी निगाह है। लद्दाख पर कब्जा जमाने के साथ-साथ चीन की तिरछी नजर पूर्वोत्तर भारत पर भी है। इसीलिए चीन के ये एयरबेस हाल के कुछ दिनों में लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक काफी सक्रिय रहे हैं। चीन ने अपने इन एयरबेस पर पक्के शेल्टर बनाए हैं और रन-वे की लंबाई भी बढ़ाई है। इसके साथ ही चीन ने एलएसी से सटे इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए अपने सर्विलांस सिस्टम को अपग्रेड किया है। (हि.स.)

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