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तेजपुर विवि के 18वें दीक्षांत समारोह को प्रधानमंत्री ने किया संबोधित


शोणितपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए तेजपुर के इतिहास, तेजपुर की विशिष्ट हस्तियों और विश्वविद्यालय में नित नये-नये हो रहे खोजों का जिक्र करते हुए विद्यार्थियों व शिक्षकों की प्रशंसा की।


इस अवसर पर असम के राज्यपाल प्रो जगदीश मुखी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोतरे, असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, असम के शिक्षा मंत्री डॉ हिमंत विश्वशर्मा, तेजपुर के सांसद पल्लव लोचन दास, विश्वविद्यालय के कुलपति बीके जैन के साथ ही 1200 से अधिक विद्यार्थियी वर्चुअल व सीधे तौर पर उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम 2020 में पास हुए 1218 छात्रों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करने का गवाह बना। 


दीक्षांत समारोह कोविड-19 प्रोटोकॉल को देखते हुए डिजिटल मोड में आयोजित किया गया जिसमें केवल पीएचडी और गोल्ड मेडलिस्ट व्यक्तिगत रूप से अपनी डिग्री और गोल्ड मेडल प्राप्त करने के लिए उपस्थित रहे। शेष प्राप्तकर्ताओं को वर्जुअल तौर पर डिग्री प्रदान करने की व्यवस्था की गयी थी। डिग्री प्राप्त करने वालों में विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के 48 टॉपर्स को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया।


प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, आज 1200 से ज्यादा विद्यर्थिय़ों के लिए जीवनभर याद रखने वाला क्षण है। शिक्षक, माता-पिता के लिए आज का दिन बहुत अहम है। सबसे बड़ी बात है कि आज से आपके करियर की शुरूआत के साथ तेजपुर विश्वविद्यालय उनके जीवन में हमेशा के लिए जुड़ गया है। आज आप जीतना खुश हैं, उतना मैं भी खुश हूं। आज आप जितनी आशा से भरे हैं, मेरा भी आप पर उतना ही अपार विश्वास है। मुझे भरोसा है कि आपने तेजपुर में रहते हुए जो सीखा है वह असम और देश की प्रगति को नई ऊंचाई देगा। इस भरोसे की कई वजहें भी हैं। पहला, तेजपुर का ऐतिहासिक स्थान इसके पौराणिक इतिहास से मिलने वाली प्रेरणा, दूसरा तेजपुर विश्वविद्यालय में आप जो काम कर रहे हैं, मुझे बताया गया है कि वह बहुत ही उत्साह जगाता है और तीसरा पूर्वी भारत के सामर्थ्य पर यहां के लोगों, यहां के नौजवानों की क्षमताओं पर राष्ट्र निर्माण के उनके प्रयासों पर सिर्फ मेरा ही नहीं पूरे देश का पूरा टूट विश्वास है।


उन्होंने कहा कि अवार्ड और मेडल देने से पहले जो यूनिवर्सिटी एंथम गाया गया है उसमें निहित भाव तेजपुर के महान इतिहास को नमन करता है। मैं इसकी कुछ पंक्तियां इसलिए दोहराना चाहता हूं क्योंकि यह असम के गौरव भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी ने लिखा है। उन्होंने लिखा है- “अग्नि गड़रर स्थापत्य कलिया भोमरा सेतु निर्माण ज्ञान ज्योतिर्मय इये स्थानते विराजिसे तेजपुर विश्वविद्यालय।” यानी जहां अग्नि गड़ जैसा स्थापत्य हो, कोलियाभोमरा सेतु हो, जहां ज्ञान की ज्योति हो, ऐसे स्थान पर विराजमान है तेजपुर विश्वविद्यालय। इन तीन पंक्तियों में भूपेन दा ने कितना कुछ वर्णित कर दिया है। अग्नीगढ़ का राजकुमार अनिरूद्ध, राजकुमारी ऊषा, भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा इतिहास, महान अहोम शूरवीर कलियाभोमोरा की दूरदृष्टि, ज्ञान का भंडार यह तेजपुर की प्रेरणा है। (हि.स.)

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