अनोज कुमार प्रजापति
संवाददाता सम्मेलन में वृद्ध टंकेश्वर लालुंग ने अपने को ठगा महसुस किया
जोनाई। असम की शिक्षा विभाग की ओर से राज्य में जहां हजारों शिक्षकों की नियुक्ति की गई हैं। वहीं राज्य में ऐसे भी कई शिक्षक और स्कुल के अन्य कर्मी भी हैं, जिनके बारे में राज्य सरकार की ओर से कोई सुध नही लिया गया। जिसके बाद स्कुल स्थापना के समय अपनी भुमि दान देने वाले लोग आज सरकार से जमीन वापस मांग रहे हैं। धेमाजी जिले के जोनाई महकमा के जोनाई गांव पंचायत के आठ नम्बर वार्ड में स्थित जयमागुड़ी, शांतिपुर, बालाबाड़ी, फार्म नगर, तीन नंबर मुरकंगसेलेक, ललाट, मिसिंगपुर, शिलिखागुड़ी, हांटापरा और चंद्र पुर सहित कुल दस गांवों के लोगों के बच्चों के लिए 1996 में स्थापित जयमागुड़ी बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिये प्रतिष्ठापक शिक्षक विजय लालुगं के पिता व भुमि दाता टंकेश्वर लालुंग ने 12 फरवरी को एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन अपने निवास स्थान पर किया है। जिसमें राज्य सरकार से विद्यालय के नाम पर दिये गये पांच बिघा जमीन वापस मांगा हैं। श्रीलालुंग ने रोते हुए कहा कि अपनी जान दे दुंगा मगर अपनी जमीन नही दुंगा।
संवाददाता सम्मेलन में टंकेश्वर लालुंग ने कहा कि जायमागुड़ी बालिका मध्य अंग्रेजी विद्यालय संचालन समिति ने प्रतिष्ठा काल के समय सर्वप्रथम प्रधान शिक्षक के रुप में टंकेश्वर सोनवाल को गांव के लोगों ने नियुक्त किया था। टंकेश्वर सोनवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्थापना काल के समय और विद्यालय संचालन समिति के सदस्यों ने घर पर आकर कहा कि आपके नाम का पांच बिघा जमीन जायमागुड़ी मध्य अंग्रेजी विद्यालय के नाम में कर दे। जिसके बदले में भुमिदाता के पुत्र विजय लालुंग को हिंदी शिक्षक के रुप में दायित्व दिया जायेगा और विद्यालय प्रदेशीकरण होने के बाद आपको जमीन पुनः वापस करने का आश्वासन भी विद्यालय के संचालन समिति के सदस्यों ने विद्यालय में सभा कर इस संदर्भ में प्रस्ताव भी लिया। मगर श्रीलालुंग ने कहा कि सरकार ने विद्यालय प्रदेशीकरण नहीं किया बालीं शिक्षक के पद का सरकारीकरण किया गया। उक्त विद्यालय में उनका पुत्र विजय लालुंग पच्चीस वर्षों तक वगैर वेतन के शिक्षादान किया नतीजतन विजय लालुंग का पद सरकारी करण से वंचित रखा गया। इसलिए भुमिदाता टंकेश्वर लालुंग अपनी भुमि को सरकार से वापस करने का अनुरोध किया है। मालूम हो की इस विद्यालय के छात्रों और सरकारी नियुक्ति प्राप्त शिक्षकों को समीप के ही एक विद्यालय में नियुक्त कर दिया गया है। साथ ही आरोप लगाया गया हैं कि उक्त विद्यालय के वर्तमान प्रधानाध्यापक भोगराम पातर ने छल-कपट करके उक्त विद्यालय को दान दिये गये जमीन को विद्यालय के नाम पर नामजारी करवा लिया और आज वे अपने आप को ठगा महसुस कर रहे हैं। साथ ही श्री लालुंग ने स्कुल के नाम पर दिये गये पांच बिघा जमीन वापस करने के लिये सरकार से मांग की हैं।





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