गुवाहाटी। प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर ,व ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे अवस्थित चमड़िया सदन, कालीपुर में ब्रह्मपुत्र साहित्य सभा द्वारा कार्यक्रम के पहले चरण में ब्र.सा.स के सभापति किशोर कुमार जैन की अध्यक्षता में वरिष्ठ पत्रकार विनोद रिंगानिया द्वारा हिंदी मे अनुदित विशिष्ट असमिया कवि अनिश उज जामान की हरा चांद का विमोचन असमिया भाषा के विशिष्ट कवि व असम साहित्य सभा के सचिव मंजीत सिंह के करकमलों से किया गया। रतन अग्रवाल द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में सभापति किशोर कुमार जैन के अलावा पुस्तक के लेखक अनिश उज जामान, कामरुप महानगर जिला साहित्य सभा के सभापति व असमिया साहित्य के ब्यंग कहानीकार दासो कलिता व अनुवादक विनोद रिंगानिया तथा संस्थापक अध्यक्ष कपुर चंद जैन मंच पर विराजमान थे। पुस्तक विमोचन करते हुए मंजीत सिंह ने कहा कि यह खुशी की बात है कि असमिया में बहुचर्चित कवि जमान अब हिंदी साहित्य में भी अपना स्थान बना लेंगे। अनुवादक विनोद रिंगानिया ने अनुवाद में होने वाली मुश्किलों का उल्लेख करते हुए बताया कि जमान की कविताओं में प्रकृति का सौन्दर्यबोध झलकता है जोकि असम की पहचान है। जमान ने अपने संबोधन में जापानी हाइकु के असमिया अनुवाद के अनुभव व्यक्त किया। शमीम अख्तर ने जमान की असमिया कविता का पाठ किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में दासो कलिता ने कहा कि किसी भी भाषा का पारस्परिक अनुवाद उस भाषा को विश्व दरबार में स्थान दिला सकता है।कवि मंजीत सिंह के संचालन में वरिष्ठ कवि शंकरलाल पारिक व कपुर चंद जैन के अलावा शंकर सैकिया, अंजना जैन, संतोष वैद, दिनकर कुमार, सुरेश गोदुका, किशोर कुमार जैन, नारायण खाकोलिया, सरला काकोती, ललित झा, रतनलाल अग्रवाल, मालविका रायमेधी अनिश उज जामान व मंजीत सिंह ने प्रासंगिक व प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध कविताओं का पाठ कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कविता के अलावा जहां एक ओर बालक विधान चमड़िया ने ढ़ोल बजाकर व बालिका वृद्धि चमड़िया ने बिहू नृत्य प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया वहीं दूसरी ओर संदीप चमड़िया ने असमिया गीत गाकर समारोह की शोभा बढ़ा कर चार चांद लगा दिए। इस कवि सम्मेलन में मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय के अध्यक्ष रवि अजितसरिया, लेखक स्तंभकार गोपाल जालान, लेखक घनश्याम लडिया, उदालगुड़ी जिला की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रंजीता अग्रवाल के अलावा ब्रह्मपुत्र साहित्य सभा के अनेकों सदस्य उपस्थित थे। चिर सेनेही मोर भाषा जननी गीत से प्रारंभ कवि सम्मेलन व पुस्तक विमोचन समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों कवियों आभार व्यक्त करते हुए ब्रह्मपुत्र साहित्य सभा के सभापति किशोर कुमार जैन ने आयोजक संदीप व रंजीता चमड़िया को विशेष तौर पर धन्यवाद दिया और असमिया फुलाम गामोछा पहनाकर सम्मानित किया तथा ओ मोर आपोनार देश के गीत के साथ समारोह संपन्न हुआ।




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें