गुवाहाटी। मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उद्योग क्षेत्र जो कुल राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 29 फीसद योगदान देता है, को राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट अप, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आदि जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर सतत जोर देने की जरूरत है।
रविवार को जनता भवन (असम सचिवालय) स्थित अपने कार्यालय में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ सरमा ने कहा कि राज्य में उद्योगों के विकास के लिए हितधारकों का विश्वास बढ़ाने के लिए विभाग को महत्वपूर्ण पहल करने की जरूरत है। पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास योजना पर विचार करते हुए डॉ सरमा ने प्रमुख सचिव उद्योग एवं वाणिज्य डॉ केके द्विवेदी से असम में इस योजना के तहत कई नई परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रस्तुत हितों के प्रस्तावों का शीघ्र निस्तारण करने को कहा।
मुख्यमंत्री डॉ सरमा ने औद्योगिक उपयोग के लिए असम में कुल भूमि के तहत व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए प्रमुख सचिव से कहा कि वे वर्तमान समय में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के पास खाली पड़ी जमीनों के व्यावसायिक उपयोग की योजना तैयार करें। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पहल के संबंध में, डॉ सरमा ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को जीवंतता और प्रतिस्पर्धात्मकता देने के लिए मौजूदा विनियमों और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने अगर की लकड़ी, चंदन की लकड़ी आदि कई पेड़ों की व्यावसायिक खेती में तेजी लाने के लिए व्यापक रोडमैप की जरूरत पर भी जोर दिया। कार्बी आंग्लांग और डिमा हसाओ जैसे जिलों में उपलब्ध कृषि योग्य भूमि के विशाल खंड पर विचार करते हुए जिलों में वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य पौधों के बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इससे राज्य में व्यापार उद्यम शुरू करने के लिए एक प्रोत्साहन मिलेगा। डॉ सरमा ने बैठक के दौरान विभाग से एक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने को भी कहा।
बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव समीर कुमार सिन्हा, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ केके द्विवेदी और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। (हि.स.)





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