गुवाहाटी। असम विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भी सदन की कार्यवाही के लिए नियम और परंपरा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक हुई। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई।
सदन में हंगामा उस समय आरंभ हुआ जब प्रश्नकाल के बाद विपक्ष प्वाइंट आफ ऑर्डर के तहत कुछ सवाल उठाने की कोशिश की। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को अनुमति नहीं दी, जिसके बाद कांग्रेस के विधायक और नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया, प्रतिपक्ष के उप नेता रकीबुल हुसैन, विधायक कमलाक्ष दे पुरकायस्थ समेत अन्य विपक्षी विधायकों ने पंरपरा का हवाला देते हुए शोर मचाने लगे। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने नियमों का हवाला देते हुए रूल बुक को पढ़ते हुए विपक्ष के सवालों को सिरे से नकार दिया।
विधानसभा अध्यक्ष दैमारी ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही नियमों के तहत संचालित होगी, परंपरा के अनुसार नहीं। विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह पहले से ही परंपरा रही है कि प्रश्नकाल के बाद अगर कुछ रह जाए तो पूरक प्रश्नों के तहत सवाल रखा जाता रहा है।
इस मामले में राज्य के परिवहन मंत्री चंद्रमोहन पटवारी चर्चा में हिस्सा लेते हुए सदन की रूल बुक पढ़ते हुए विपक्ष को समझाने की कोशिश की। मजदार बात यह है कि पक्ष और विपक्ष दोनों ही रूल बुक पढ़ते हुए उसका अपने अनुसार मतलब निकालने की कोशिश की। हंगामा के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात को उठाते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक ही बात को अपने-अपने अनुसार बताने की कोशिश कर रहा है। अध्यक्ष की बातों को सुनकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों हंसने लगे।
मंत्री पटवारी ने चर्चा के दौरान ही विपक्ष द्वारा एक असंसदीय शब्द को उठाते हुए अध्यक्ष से उसे सदन की कार्यवाही से बाहर करने की मांग की। जिसे अध्यक्ष हटाने का निर्देश दिया। हंगामा के बीच अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें असमिया भाषा के कुछ शब्द समझ में नहीं आ रहे हैं, जिसके चलते समस्या हो रही है। अध्यक्ष ने इस बात को इस तरह से कहा कि पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।
अंत में संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि विधानसभा की कमेटी में इस बात पर सभी मिलकर चर्चा करेंगे कि सदन रूल बुक के तहत चलेगा या परंपरा के अनुसार। हजारिका के इस बयान के बाद हंगामा शांत हो गया। जिसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से सुचारू रूप से आरंभ हुई।
नियम और परंपरा को लेकर सत्र के पहले दिन सोमवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोंकझोक हुई थी। मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने स्वयं खड़ा होकर अपनी बातें रखते हुए कहा था कि वे समूचे सदन के नेता हैं। इसलिए सभी बातों पर विचार कर सदन को चलाया जाएगा। हालांकि, सरकारी पक्ष सदन को रूल बुक से चलाने पर जोर देता नजर आया। (हि.स.)








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