गुवाहाटी। शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अखिल गोगोई असम विधानसभा के बजट सत्र पहले दिन सोमवार को आक्रामक होने की भरपूर कोशिश की, लेकिन सत्ता पक्ष और सदन के नियमों के आगे वे बेबस नजर आए।
विपक्ष ने महंगाई पर सदन में सत्र के पहले दिन स्थगन प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव पर अनुमति दिये जाने के चलते विपक्षी विधायक सदन से वाकआट कर दिया। सदन से बाहर निकलने के बाद मीडिया के सामने अखिल गोगोई ने सरकार की कड़ी आलोचना की।
अखिल गोगोई ने कहा, खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई, जिससे आम आदमी की स्थिति बेहद खराब हो गयी है। कोरोना, लॉकडाउन ने उत्पादन, पुर्नउत्पादन, व्यवसाय आदि बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। देशभर में कीमतों में बढ़ोत्तरी ने आम जनता के सामने समस्या पैदा कर दिया है। इसलिए आज सदन में विपक्ष के विधायकों ने बैठक कर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। लेकिन अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। असम में आज महंगाई सबसे बड़ी समस्या है। जब तक इस पर चर्चा नहीं होगी तो सभा में क्या चर्चा होगी?
अखिल गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि विपक्ष अगर स्थगन प्रस्ताव पर पेश करती है तो सरकार इसे सम्मान की बात नहीं मानती है। अगर जनता महत्वपूर्ण होती है तो सरकार चर्चा के लिए मौजूद रहेगी। लेकिन, दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी कारणवश अनुमति नहीं दी जा सकती। हम इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
साथ ही कहा कि उपरोक्त चर्चा के दौरान अध्यक्ष ने सदन स्थगित करने की घोषणा कर दिया, बावजूद सदन की कार्यवाही जारी रही। पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध सदन की कार्यवाही चल रही है। अगर असम विधानसभा में महंगाई पर चर्चा नहीं होती है तो इससे बड़ा काला अध्याय नहीं हो सकता। हमें महंगाई पर बोलने के लिए समय देना होगा। फिर से सवाल उठाए जाएंगे। सरकार को इसका जवाब देना होगा। विरोध जारी रहेगा।
अखिल गोगोई ने आगे कहा कि मैं नीति और नियमों को अच्छी तरह से पढ़ने के बाद सदन में आया हूं। मेरे बोलने पर सरकारी पक्ष शोर मचाता है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह मुझे दो मिनट बोलने देंगे। मैंने आज सात मिनट तक बात की। इसलिए इसका प्रमाण यह है कि मुख्यमंत्री की बातें कानून नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि अखिल गोगोई कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) नामक संगठन के जरिए राज्य में लंबे समय से राज्य सरकार चाहे वह भाजपा की हो या कांग्रेस की रही हो, की नीतियों के नाम पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन करते रहे हैं। इस बीच नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने के दौरान गुवाहाटी में हुई हिंसा के चलते अखिल को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में माओवादी संपर्क के तहत देशद्रोह की धाराओं में एनआईए काफी समय तक जांच करती रही। जेल में रहते हुए ही अखिल ने नयी राजनीतिक पार्टी राइजर दल बनाया। पार्टी के एकमात्र विधायक अखिल शिवसागर से चुनकर आए। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद से यह कयास लगाये जा रहे थे कि विधानसभा में मुख्यमंत्री पर अखिल जमकर हमलावर होंगे, लेकिन पार्टी एकमात्र विधायक होने के चलते उन्हें सदन में बोलने के लिए अधिक समय नहीं मिलने वाला है, यही कारण है कि अखिल सदन के बाहर मीडिया के सामने अपनी खीझ मिटाते दिखे।








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