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संघर्षपूर्ण जीवन ने लवलीना को ओलंपिक तक पहुंचाया

 


संपत मिश्र


लवलीना बोरगोहाई का नाम आज विश्व पटल पर एक चमकता नाम बन गया है। खेल संसाधनों की कमी के बीच गुजरा बचपन आज किसी अभाव या संसाधन  का मोहताज नहीं रहा है। अपनी सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और बुलंद इरादों के बदौलत लवलीना  बोरगोहाई आज ओलंपिक में सफल मुक्केबाजी के रूप में उभरी है। असम के गोलाघाट जिले के बड़पथार मौजा में छोटा सा गांव बारहघरिया में एक साधारण परिवार में जन्म लेकर लवलीना टोक्यो ओलंपिक में 69 किलोग्राम वजन में मुक्केबाज़ी का खिताब जीतकर सबकी चहेती बन गई है। ओलंपिक में भाग लेने वाली असम की यह पहली महिला खिलाड़ी है। बॉक्सिंग में आने से पहले यह किक बॉक्सिंग किया करती थी। जिसमें यह राष्ट्रीय स्तर पर मेडल भी जीत चुकी है। लवलीना की दो जुड़वा बहन लीचा और लीमा को देखकर लवलीना ने किक बॉक्सिंग करना शुरू किया। लवलीना की दोनों बहनों किक बॉक्सिंग में नेशनल मेडल भी जीत चुकी है। बॉक्सिंग की ओर उसका रुझान प्रसिद्ध मुक्केबाज मोहम्मद अली से प्रभावित होकर हुआ था। इसके पिता टिकेन बोरगोहाई ने अपनी बेटी को बॉक्सिंग के प्रति उत्साहित करते हुए मोहम्मद अली के बारे में बताते थे। पिता की प्रेरणापूर्ण बातें लवलीना को मुक्केबाज बनाने में सफल साबित हुई। जल्द ही किस्मत इस पर मेहरबान होने लगी और जब वह नौवीं कक्षा में पढ़ती थी तब स्पोर्ट्स अथॉरिटी आफ इंडिया (SAI) के असम रीजनल सेंटर में चयनित होने के बाद बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लेने लगी। लवलीना को बचपन में काफी संघर्ष करना पड़ा था। इसके पिता की छोटे से गांव बारह घरिया में छोटी सी दुकान थी। उसी दुकान पर इसका सारा परिवार का भरण पोषण निर्भर करता था। उस समय लवलीना के घर में ही नहीं उसके गांव में भी  मूलभूत सुविधा व खेल संसाधनों की कमी थी। मगर उसकी मां मामोनी बोरगोहाई ने तीनों बहनों की इच्छाओं का पूरा ध्यान रखा और कभी भी अपनी बेटियों को निरुत्साहित नहीं किया। मां ने ही लवलीना को उत्साहित कर कुछ अच्छा करने की हिम्मत प्रदान की थी। जिसका नतीजा यह रहा कि आज लवलीना असम की पहली महिला खिलाड़ी बन गई जो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रही है। ये अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी है। लवलीना के कोच संध्या गौरांग ने बताया कि जब वह साई में ट्रेनिंग के लिए आई तो वह काफी डर के साथ खेलती थी मगर धीरे-धीरे वह निडर होकर खेलने लगी। लवलीना 2018 और 2019 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी थी। दिल्ली में आयोजित पहले इंडियन ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में सिल्वर और गुवाहाटी में आयोजित दूसरे इंडियन ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल भी जीत चुकी है। टोक्यो ओलंपिक में अपना पहला ओलंपिक खेल कर अपनी हिस्सेदारी निश्चित कर लवलीना ने कास्य पदक लाकर भारत और अपने गृह राज्य असम का नाम विश्व पटल के नक्शे पर अंकित कर दिया।

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